तपिशः आजमाएं यह घरेलू नुस्खे

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गाजीपुर। मौसम में तपिश लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हीट स्ट्रोक और डिहाइट्रेशन का खतरा बढ़ गया है। चिकित्सकों की मानें तो अधिक तापमान से आंखों में खून जम सकता है। आंखें लाल होंगी। आंखों की सफेद पुतली को नुकसान पहुंच सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ सकता है। डिहाइड्रेशन की वजह से दिमाग को नुकसान पहुंचता है। शरीर बाहरी तापमान के हिसाब से खुद का तापमान स्थिर करने के लिए पसीना छोड़ता है। अधिक पसीना निकलने से व्यक्ति बेहोश हो सकता है। दिमाग को क्षति पहुंच सकती है। इंसान कोमा में पहुंच सकता है। तापमान बढ़ने से कई बार नाक में सूखापन आ जाता है। इससे साइनस की समस्या भी हो सकती है। नाक से खून भी आ सकता है। गर्मियों में शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली पराबैंगनी किरणों की मात्रा अधिक होती है। त्वचा पर इसका प्रतिकूल प्रभाव होता है। जलन के साथ-साथ लंबे समय बाद त्वचा के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। गर्मियों में डायबिटीज रोगियों को बड़ा नुकसान होता है। उनका शुगर स्तर बढ़ जाता है। चक्कर आना, घबराने की शिकायतें होने लगती हैं। .

यह हैं बचाव के घरेलू नुस्खेः जौ, पुदीना, दही, मठ्ठा, मौसमी ताजे फल, नींबू शिकंजी, बेल का शरबत ज्यादा से ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करें। त्वचा पर गर्मी का असर होने पर चंदन और मुल्तानी मिट्टी का लेप करें। पुदीने के इस्तेमाल से लू लगना, बुखार और गैस दूर होती है। अपच, पित्त की अधिकता, पेट दर्द में जलजीरा लाभकारी है। नारियल में अधिक मात्रा में पौष्टिक तत्व हैं। इसका भी खूब इस्तेमाल करें। साथ ही सफेद रंग के कपड़े पहनें। काले रंग के कपड़े पहनकर धूप में निकलने से शरीर को नुकसान हो सकता है। काला रंग ऊष्मा को अधिक खींचता है।. नमक शरीर में चीनी के साथ तेजी से अवशोषित होता है। पसीना बहने से शरीर में नमक की कमी हो जाती है। ऐसे में चीनी-नमक का घोल जरूर लेना चाहिए। कोशिश यही रहे कि दिन के पहल दस बजे से शाम चार बजे तक बाहर कम हीं निकलें। दर असल इस अवधि में सूरच की पराबैंगनी किरणों की मात्रा अधिक होती है। इससे त्वचा को नुकसान होता है। अगर आप बहुत थकान महसूस कर रहे हैं तो पानी के छीटों से फ्रेश महसूस करेंगे। सादा पानी भी आपकी त्वचा को तरोताजा रखता है।

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