खारा के शिव मंदिर में मांगी हर मुराद होती है पूरी

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बाराचवर (यशवंत सिंह)। मांटा मुहम्मदपुर खारा गांव स्थित अति प्राचीन शिव मंदिर की अपनी अलग पहचान है। माना जाता है कि इस मंदिर में आकर मांगी गई मन्नत पूरी होती है। जनश्रुति के मुतबिक मांटा गांव का व्यापारी सिद्धी कानू बैलगाड़ी पर गुड़ लाद कर बाजार बेचने जा रहे थे। कुछ ही दूर निकले थे कि जंगल में उनके बैल बैठ गए। सिद्धी कानू बैलों को उठाने के लिए हर संभव कोशिश किए लेकिन नाकाम रहे। तभी जंगल से आवाज आई कि इस जंगल में जहां तुम्हारे बैल बैठे हैं, उसकी उत्तर दिशा में कुछ दूर झाड़ी में शिव लिंग है लेकिन उसकी पूजा-अर्चना नहीं हो रही है। सिद्धी कानू शिव लिंग को ढूंढ़ निकाले और विनती करते हुए अपने बैलों को उठाने की बात कहे। साथ ही क्षमा याचना करते हुए कहे कि बाजार से लौट कर आने के बाद उस स्थल पर भव्य मंदिर बनवाएंगे। उसके बाद वह अपनी बैलगाड़ी के पास आए। तब तक बैल उठ चुके थे।

बाजार से लौट कर सिद्धी कानू ने परिवार तथा गांव के लोगों से अपने साथ हुए वाकये की चर्चा की लेकिन उनकी बातों पर किसी को विश्वास नहीं हुआ। तब वह उन्हें लेकर शिव लिंग स्थल पर पहुंचे। उसके बाद उस शिव लिंग की पूजा-अर्चना नियमित होने लगी। साथ ही सिद्धी कानू का गुड़ का व्यापार भी बढ़ने लगा। उन्होंने अपने वचन को पूरा किया। भव्य मंदिर बनवाया। उसी बीच वह अपना व्यापार समेट कर मय परिवार बलिया जनपद के रतसड़ चले गए लेकिन वह और उनके परिवार के दिल में शिव मंदिर के प्रति आगाध निष्ठा, श्रद्धा बनी रही।

मंदिर के पुजारी आदिनाथ गिरि बताते हैं कि हर साल सिद्धी कानू के वंशज मय परिवार मंदिर में आकर पूजा- पाठ करते हैं। परिवार में जब कोई नया बच्चा पैदा होता है तो उसका मुंडन भी वह इसी मंदिर परिसर में कराते हैं। श्रावण माह के हर सोमवार को क्षेत्र के श्रद्धालु गौसपुर घाट से गंगा जल लाकर महादेव का अरघा भरते हैं। इतना ही नहीं जब सूखा पड़ता है। तब किसान गंगाजल लाकर महादेव जी का अरघा भरते हैं। उनकी मुराद पूरी भी होती है।

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