वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.गौरीशंकर राय विमल नहीं रहे

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गाजीपुर। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.गौरीशंकर राय विमल(80) नहीं रहे। गुरुवार की सुबह शहर के चंदन नगर(रौजा) स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से गाजीपुर के साहित्यकार, प्रबुद्धजनों में शोक है। वह काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार गाजीपुर श्मशान घाट पर दोपहर में हुआ। मुखाग्नि उनके इकलौते पुत्र संजय राय ने दी।

डॉ.गौरीशंकर मूलतः जमानियां क्षेत्र के सोनहरिया गांव के रहने वाले थे और महात्मा गांधी शति स्मारक महाविद्यालय, गरुआ-मकसूदपुर में हिंदी विभाग के अध्यक्ष पद से रिटायर थे। डॉ.गौरीशंकर ने कई किताबें लिखीं। उनकी चर्चित कृति प्रसाद साहित्य में उदात्त तत्व है। यह उनका शोध प्रबंध है। इसके अलावा निबंधों का संग्रह साहित्य बोध भी काफी सराहा जाता है। इसी तरह प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका युग सत्य, आंचलिका त्रैमासिक पत्रिका तथा नागरी प्रचारिणी सभा की पत्रिका नागरी पत्रिका में भी उनके कई निबंध प्रकाशित हुए थे। गांव गिरांव और चौपाल की बातें पुस्तक भी आंचलिक साहित्य में काफी चर्चित हुई। काव्य विधा पर भी इनका पूरा दखल था और कवि सम्मेलनों के मंचों पर उनकी उपस्थिति गौरवमयी मानी जाती थी।

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