नामवर रहे ना रहे

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गाजीपुर : रवींद्रपुरी स्थित वाणी प्रतिष्ठान में शुक्रवार को रामचरित उपाध्याय स्मृति संस्थान की ओर से हिंदी समालोचक डा. नामवर सिंह के निधन पर शोक सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर दो मिनट का मौन रखकर गतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर चर्चा की गई।

वरिष्ठ साहित्यकार डा. जितेंद्रनाथ पाठक ने कहा कि उन्होंने छायावाद के सौंदर्य भावना को व्यक्ति की स्वाधीनता की भावना से जोड़ा और रहस्यवाद को भारत की स्वाधीनता के लिए लड़ने वाली मध्यमवर्गीय जनता की जीवन दृष्टि कहा। रामअवतार ने डा. नामवर को प्रखर पत्रकार बताते हुए उनके जनयुग और आलोचना की संपादन कला पर प्रकाश डाला। डा. अंबिका पांडेय ने डा. नामवर के जीवनव्यापी संघर्ष और लेखन की गरिमा का उल्लेख किया। डा. गंगेश ने डा. नामवर की कविता से आलोचना की ओर यात्रा को हिंदी के लिए शुभ बताया। डा. एसएन मिश्र ने उनको अपनी भूल स्वीकार करने वाला आलोचक कहा। शोक सभा में डा. रमाशंकर सिंह, डा. विक्रमादित्य मिश्र, डा. ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सियाराम शरण वर्मा, प्रमोद राय, उदय प्रताप पांडेय थे। अध्यक्षता ड. मांधाता राय ने की।

खानपुर – सिधौना बाजार में भी शुक्रवार को बैठक आयोजित कर डा. नामवर सिंह के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया गया। साथ ही देश के प्रथम शिक्षामंत्री अबुल कलाम को उनके पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बैठक में नामवर सिंह के साथ विद्यापीठ वाराणसी में बिताए स्मृतियों को याद करते हुए साहित्यकार रामजी बागी ने कहा कि साहित्यिक अध्ययनशील, विचारक और हिन्दी में अपभ्रंश साहित्य के आरम्भ से निरंतर समसामयिक साहित्य से जुड़े रहे। जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि भारत के पहले शिक्षामंत्री और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना में सबसे अविस्मरणीय कार्य करने वाले मौलाना अबुल कलाम आजाद एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्वान भी थे। वे कवि, लेखक, पत्रकार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी भी रहे। कैलाशपति पांडेय, कमलेश यादव, नंदलाल मिश्र, लक्ष्मी प्रजापति आदि रहे। उधर जनपद के प्राख्यात डॉ एम डी सिंह भी नामवर सिंह के निधन से काफी मर्माहत दिखे। उन्होनें अपनी श्रद्धांजलि खुद रचीत कविता के माध्यम से व्यकत की ।

नामवर

काम कहां जाता है

बिखर जाता है बीज बन

फलता फूलता है

इस वस्तुमूलक जगत में

नित बढ़े निरंतर

दाम कहां जाता है

नामवर रहे ना रहे

देह वस्तु है

भोग्य जीव का नश्वर

एक न एक दिन चुक जाता है

जीव अमर

जीवन अनंत है

नाम जीव का रहेगा

नामवर रहे ना रहे

आत्माराम किधर गया पता नहीं

आत्मज दुखी हैं रो-रोकर बेहाल

आत्मन मनुज का

मोह माया से मुक्त

चला गया हो चाहे छोड़ सब कुछ

राम कब छोड़ता है किसी को

नामवर रहे ना रहे ।

डॉ एम डी सिंह

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