महा बलिदान करने वालों में श्याम नारायण का भी नाम जुड़ा

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बिरनो। मां भारती के लिए शहादत देने वाले वीर शहीदों की श्रृंखला में जिले के एक और लाल का नाम जुड़ गया। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ में बिरनो थाना क्षेत्र के हसनपुरा गांव निवासी सीआरपीएफ के नायब दारोगा श्याम नारायण यादव (50) शहीद हो गए। उनके शहादत पर जनपदवासी जहां गर्व कर रहे हैं वहीं अपने वीर सपूत को खोने से काफी गम भी हैं उन्हें। परिजनों ने कहा कि जवान की शहादत पर उन्हें गर्व है लेकिन आतंकियों के खिलाफ सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। डीएम व एसपी भी परिजनों का ढांढस बधाते रहे।  श्याम नारायण क्षेत्र में शामा पहलवान के नाम से भी जाने जाते थे। 1991 में रामपुर जिले से सीआरपीएफ में 92 बटालियन में भर्ती हुए थे। वर्तमान जम्मू के अखनूर में तैनात थे। एक मार्च को जिस वक्त देशवासी विग कमांडर अभिनंदन की वतन वापसी पर जश्न मना रहा था, ठीक उसी वक्त श्यामनारायण अपने साथियों के साथ हंदवाड़ा में आतंकियों से लोहा ले रहे थे। इस मुठभेड़ में गोली लगने से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए।

इलाज के लिए उन्हें सेना के अस्पताल में भरती कराया गया लेकिन वह शहीद हो गए। सीआरपीएफ कमांडेंट ने उनके छोटे बेटे प्रवीण प्रकाश यादव को शनिवार की रात इसकी जानकारी दी। इसके बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया। उनकी पत्नी उर्मिला देवी और 105 वर्षीय मां सितावती बेसुध हो गईं। उनके दोनों पुत्र अरिवंद (22) और प्रवीण प्रकाश (20) का रो-रो कर बुरा हाल है। पिता के शहादत की सूचना पर बड़ा बेटा अरविद दिल्ली रवाना हो गया। परिजनों ने बताया कि हमें अपने जवान की शहादत पर गर्व है। सरकार को आतंकवादियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। अब सहा नहीं जाता। आतंकवाद को जड़ से समाप्त करना बहुत आवश्यक है। जिलाधिकारी के. बालाजी व पुलिस अधीक्षक अरविद चतुर्वेदी भी शहीद के घर पहुंचे। उन्होंने परिजनों का ढांढस बंधाते हुए कहा कि हम आपके साथ हैं। भरोसा दिया कि सरकार से मिलने वाली हर सहायता को तुरंत पहुंचाया जाएगा। देर रात तक शहीद के पार्थिव शरीर आने की संभावना है।

लाल हो लाल…

अरे लाल हो लाल. अब केके सिपहिया कह के बोलाइब हो लाल..। ये करुण क्रंदन था शहीद की 105 वर्षीय मां सितावती देवी का। मां बार-बार यही कह-कह कर रो रही थीं और रोते-रोते वह बेहोश हो जा रही थीं। पास-पड़ोस की महिलाएं शहीद की बूढ़ी मां का पूरे दिन ढांढस बंधाती रहीं। मां और पत्नी का करूण क्रदन देखकर सभी आंखें भर जा रही है। श्याम नारायण यादव चार भाई थे। इनके पिता मुखराम यादव का करीब दो वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। इनकी शादी 1987 में प्रमिला के साथ हुई थी। बड़ा बेटा अरविद पालिटेक्निक कर बीटेक की तैयारी कर रहा है, वहीं छोटा पुत्र प्रवीण प्रकाश बीकाम कर नौकरी की तैयारी कर रहा है। श्यामनारायण दो माह पूर्व छुट्टी के बाद घर से वापस जम्मू सीमा पर गए थे। वह अपनी पत्नी प्रर्मिला देवी से जल्दी घर वापस आने की बात कहकर गए थे। शहीद श्यामनारायण यादव के घर पहुंचने वालों का पूरे दिन तांता लगा रहा। सपा विधायक डा. विरेंद्र यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष

रामधारी यादव, राजेश कुशवाहा, भाजपा नेता जितेंद्रनाथ पांडेय, शोएब अंसारी, पारस यादव, उदय नारायण, मरदह ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि नितेश कुशवाहा, बिरनो ब्लाक प्रमुख प्रवीण कुमार यादव, सदानंद यादव सहित सैकड़ों लोग पूरे दिन मौके पर मौजूद रहे। पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह भी सांत्वना देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि पूरा देश इस परिवार के साथ खड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद श्यानारायण यादव के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए इनके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने परिवार के एक सदस्य को मृतक आश्रित के तौर पर सरकारी नौकरी देने की भी बात कही। उन्होंने कहा है कि शहीद की स्मृति में एक सड़क का नामकरण भी किया जाएगा। वीर सूपतों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। पूरा देश शहीद के परिवार के साथ खड़ा है।

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