ड़ीएम हजुर ! अब फिर हमीद सेतु पर भारी वाहनों का आवागमन बंद

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गाजीपुर । एक माह 16 दिन बाद हमीद सेतु का रोलर बेयरिग एक बार फिर अपनी जगह से खिसक गया है। अब यह पिछली बार से दो इंच ज्यादा अर्थात 10 इंच खिसका है। संयोग रहा कि मार्निक वाक के लिए निकले लोगों की नजर पड़ी और सूचना पर जिलाधिकारी के. बालाजी ने तत्काल बड़े वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी अन्यथा बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता था। प्रथम²ष्टया बेयरिग खिसकने की वजह ओवरलोडिग को बताया जा रहा है। एनएचएआइ के प्रोजेक्टर मैनेजर एसबी सिंह ने धंसे स्लैब का निरीक्षण किया। पुल कब तक चालू होगा, फिलहाल यह जांच के पहले बताने की स्थिति में कोई नहीं है। हालांकि पिछली बार 20 दिन इसी काम में लग गए थे।

हमीद सेतु पर लोग मार्निंग वाक के लिए निकले थे। पुल पर वाहनों के रेले के बीच कुछ लोगों की नजर खिसके स्लैब पर पड़ी तो इसकी गंभीरता को समझते हुए उन्होंने पुलिस को जानकारी दी। मौके पर पहुंचे सुहवल थानाध्यक्ष ने इसकी सूचना डीएम के साथ ही एनएचएआइ के अधिकारियों को भी दी तो संबंधितों के होश उड़ गए। जिलाधिकारी ने तुरंत पुल पर बड़े वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया। पुल के दोनों तरफ पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है। यह वही स्लैब है जो पिछली बार भी खिसका था। ऐसे में सवाल बड़ा और अहम है कि आखिर ऐसा फिर हुआ क्यों? विदित हो कि यह 1100 मीटर लंबा पुल है, जो 12 पिलर,  26 ज्वाइंटरों व 52 रोलर बेयरिग पर टिका है। यह पुल मात्र जनपद ही नहीं, पड़ोसी राज्य बिहार सहित पूरे पूर्वांचल को जोड़ता है। बीते 31 दिसम्बर को गंगा नदी पर बने हमीद सेतु के पिलर संख्या छह व सात के बीच ज्वाइंटर नंम्बर 14 के दोनों तरफ की रोलर बेयरिग खिसकने से आठ इंच स्लैब धंस गया था। काफी मशक्कत से 20 दिन बाद इसकी मरम्मत हो सकी थी। लोग इस बात से परेशान हैं कि कहीं छोटे चार पहिया वाहनों पर भी रोक न लग जाए। ओवरलोड पर बैन नहीं हुआ तो हो सकता है भारी नुकसान : विभागीय कर्मियों के अनुसार पुल की भार-क्षमता 40 टन की है जबकि 80 से 100 टन भार क्षमता तक वाले वाहनों का आवागमन

हो रहा है। पिछली बार सेतु की मरम्मत करने आए इंजीनियरों ने चेताया था कि ओवरलोड वाहनों पर रोक नहीं लगी तो फिर से स्लैब धंस जाएगा। अगर जल्द ओवरलोड पर बैन नहीं लगा तो भारी नुकसान हो सकता है। जिम्मेदार विभाग ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की बात तो कहता है लेकिन करता हुआ दिखाई नहीं देता। लोगों का आरोप है कि विभाग इसलिए कार्रवाई नहीं करता क्योंकि यहां से लाखों की अवैध वसूली होती है और चढ़ावा उन तक पहुंचता है जिन पर ओवरलोडिग रोकने की जिम्मेदारी है। पहले जांच फिर होगी मरम्मत, बढ़ी चिता : बार-बार रोलर बेयरिग का खिसकना बेहद चिता की बात है। यह डिजाइन फेल्योर को भी इंडिकेट कर रहा है। रविवार तक एनएचएआइ की टीम पुल की सभी बेयिरंग की जांच करेगी। इसके आधार पर ही मरम्मत की जाएगी ताकि इसे रोका जा सके। सबसे बड़ा मसला ओवरलोडिग का भी है। यदि बड़े ओवरलोडेड वाहनों के आवागमन पर रोक नहीं लगी तो दिक्कत होगी। फिलहाल जांच के बाद ही बताया जा सकता है कि वास्तव में फिर बेयिरंग क्यों खिसकी।

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