मुन्ना बजरंगी की जान की कीमत और धनंजय की सियासी हसरत!

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गाजीपुर। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी जीते जी अपना राजनीतिक साध पूरा नहीं कर पाया लेकिन उसकी मौत के बाद विरोधी मुन्ना बजरंगी के आर्थिक साम्राज्य के साथ ही उसकी जान की कीमत पर अपनी राजनीति चाहत भी पूरा करना चाहते हैं। पूर्व सांसद धनंजय सिंह इस बार भी लोकसभा चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं। चर्चा है कि अपनी पुरानी पार्टी बसपा में दोबारा इंट्री नहीं मिलने के बाद वह अब भाजपा में अपने लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं। उनकी पूरी कोशिश है कि भाजपा उन्हें टिकट दे। रही बात सीट की तो उनकी पहली पसंद जौनपुर है या फिर प्रतापगढ़। यह वही धनंजय सिंह हैं जिन पर मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में पहले और बाद में उसकी पत्नी सीमा सिंह अंगुली उठाई थी। चर्चा है कि धनंजय भाजपा टिकट के लिए पूर्वांचल से जुड़े एक केंद्रीय मंत्री के साथ ही भाजपा संगठन से जुड़े एक कद्दावर नेता को भी साधने की कवायद में जुटे हैं। उस केंद्रीय मंत्री से मुन्ना बजरंगी आखिर तक अदावत रखे था।

जाहिर है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त। इस लिहाज से धनंजय  और उनके लोग यह मान रहें हैं कि उस केंद्रीय मंत्री के दिल में उनके लिए जगह बन चुकी है। फिर भाजपा संगठन के उस असरदार नेता को अपना पैरवीकार बनाने के लिए धनंजय सिंह व उनके लोग भाजपा में अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर रहे हैं। चर्चा करने वाले तो यह भी कह रहें हैं कि धनंजय अपने मकसद में काफी हद तक कामयाब भी हो गए हैं। शायद यही वजह रही कि दो-तीन दिन पहले लखनऊ में हुई अपनों की  बैठक में धनंजय सिंह ने दावा कर दिया कि वह  भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। खैर इस चर्चा की हकीकत आगे सामने आएगी लेकिन धनंजय सिंह की खुद की छवि कोई साफ-सुथरी नहीं है। पुलिस फाइल में उनके खिलाफ दर्जनों संगीन मामले दर्ज हैं। ऐसे में सवाल है कि विरोधी पार्टियों से हर मामले में खुद को अलग होने का दावा करने वाली भाजपा के शीर्ष नेतृत्व समूह को धनंजय सिंह कैसे कबूल होंगे। वह भी तब जब इसी दागदार छवि के चलते ही बसपा उनके लिए अपना दरवाजा बंद कर चुकी है।

इस संदर्भ में मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह का आरोप भी काबिलेगौर है कि उनके पति जौनपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी रहे थे। यह बात धनंजय सिंह को नागवार लग रही थी। फिर तो वह   बागपत जेल में हुई उनके पति की हत्या की साजिश में दूसरे दुश्मनों के साथ हो गए। मुन्ना बजरंगी की हत्या पिछले साल नौ जुलाई को हुई थी। मालूम हो कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में धनंजय सिंह जौनपुर सीट से बसपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे लेकिन घरेलू नौकरानी की कथित हत्या के मामले में पत्नी सहित फंस गए थे। तब बसपा सुप्रीमो मायावती अपनी पार्टी से उन्हें निकाल बाहर की थीं। उसके बाद वह वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव जौनपुर से ही निषाद पार्टी से लड़े थे और हार गए थे। गाजीपुर में भी पूर्व सांसद धनंजय सिंह के काफी समर्थक हैं।

 

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