उम्मीदवार मायावती का, पर प्रतिष्ठाा फंसी अखिलेश यादव की

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गाजीपुर। यह ठीक है कि लोकसभा की गाजीपुर सीट सपा-बसपा गठबंधन में बसपा के खाते में चली गई है और बसपा यहां के लिए अपने उम्‍मीदवार के रूप में पूर्व सांसद अफजाल अंसारी का नाम भी घोषित कर चुकी है लेकिन पिछले कई चुनावों के नतीजे बताते हैं कि गाजीपुर सपा का गढ़ है। सपा गाजीपुर संसदीय सीट को तीन बार फतह भी की है। इस दशा में देखा जाए तो गाजीपुर सीट पर बसपा की उम्‍मीदवारी भले रहेगी लेकिन सपा की प्रतिष्‍ठा ही दावं पर लगी रहेगी। इसके लिए सपा को कड़ी मेहनत करनी होगी। सपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपना परंपरागत वोट बसपा पर ट्रांसफर कराने की होगी। वोटिंग मशीन में अपना चुनाव निशान साइकिल न पाकर सपा के परंपरागत वोटरों के भ्रमित होने का खतरा भी बना रहेगा। इसके लिए उल्‍टी हवा बहाने की विरोधियों के पास गुंजाइश भी बनी रहेगी। सपा के सामने अपने कॉडर को भी ठीक से सक्रिय करने की चुनौती बनी रहेगी। गठबंधन में सीट बसपा के खाते में जाने से मायूस बैठे कार्यकर्ताओं को भी हरकत में लाने का काम सपा को करना होगा। गाजीपुर से सटी आजमगढ़ तथा बलिया संसदीय सीट सपा के जिम्‍मे है। बल्कि आजमगढ़ सीट पर तो सपा मुखिया अखिलेश यादव के लड़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है। तब हैरानी नहीं कि गाजीपुर के सपा कॉडर आजमगढ़, बलिया का रूख कर सकते हैं। उन्‍हें गाजीपुर में रोकना भी सपा के लिए अहम होगा। फिर गठबंधन विरोधियों को किसी तरह के अफवाह फैलाने से रोकना भी कम कठिन नहीं होगा। इसके लिए सपा मुखिया को खुद गाजीपुर आना पड़ेगा। ज्‍यादा नहीं बीते विधानसभा चुनाव की बात है। तब सपा का गठबंधन कांग्रेस से था और चुनाव अभियान के क्रम में सपा मुखिया अखिलेश यादव गाजीपुर आए थे। गठबंधन के तहत विधानसभा की मुहम्‍मदाबाद की सीट पर कांग्रेस लड़ रही थी लेकिन अखिलेश यादव ने वहां के अपने वोटरों को कोई स्‍पष्‍ट संदेश नहीं दिया था। नतीजा सपा के वोटर कांग्रेस को छोड़ दिए थे। उसकी पुनरावृत्ति इस लोकसभा चुनाव में भी न हो जाए। वैसे सपा के लोगों का कहना है कि उनकी पार्टी के वोट को बसपा पर ट्रांसफर कराना कोई मुश्किल नहीं है। विधानसभा के 1993 के चुनाव में सपा का बसपा से गठबंधन हुआ था। तब सपा के वोटरों के बूते ही बसपा अपने हिस्‍से की गाजीपुर की सात में से चार विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज हुई थी। उधर बसपा के लोगों की कोशिश होगी कि लोकसभा चुनाव अभियान में सपा मुखिया का गाजीपुर में रैली जरूर हो। दरअसल गाजीपुर में लोकसभा चुनाव का मतदान अंतिम चरण में 19 मई को है। लिहाजा सपा-बसपा गठबंधन के नेतृत्‍व समूह को गाजीपुर में आने का मौका मिलेगा।

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