बाबू राजेश्वर सिंह पंचतत्व में विलीन, शोक में न्यायिक कार्यों से विरत रहे वकील

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गाजीपुर। बाबू राजेश्‍वर सिंह (96) बुधवार की शाम पंचतत्‍व में विलीन हो गए। दाह संस्‍कार गाजीपुर श्‍मशान घाट पर हुआ। उनकी अंतिम यात्रा गाजीपुर शहर के तिलकनगर स्थित आवास से शुरू हुई। उसमें सैकड़ों लोग शामिल थे। उनमें समाजसेवी, राजनीतिक व वकीलों सहित बुद्धिजीवी थे। बाबू राजेश्‍वर सिंह का निधन मंगलवार की शाम बीएचयू अस्‍पताल में हो गया था। अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर तिलकनगर स्थित आवास पर रखा गया था। जहां काफी संख्‍या में लोग पहुंचे थे। डीएम के. बालाजी, पुलिस कप्‍तान डॉ. अरविंद चतुर्वेदी भी थे। उन्‍होंने एहतिहातन बाबू राजेश्‍वर सिंह के आवास की ओर जाने वाले रास्‍ते पर बैरिकेडिंग कराकर चरपहिया वाहनों को रोकवा दिया था। बाबू राजेश्‍वर सिंह गाजीपुर के मदनमोहन मालवीय कहे जाते थे। वह गाजीपुर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्‍थान पीजी कॉलेज सहित कई शिक्षण और समाजसेवी संस्‍थाओं के संस्‍थापक थे। उनके निधन पर कई लोगों ने शोक संवेदना जताई है। उनके आवास पर पहुंचकर अंतिम दर्शन के बाद सपा के पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने कहा कि बाबू राजेश्‍वर सिंह का निधन गाजीपुर के बुद्धिजीवी समाज और शिक्षा के क्षेत्र में अपूर्णीय क्षति है। उधर केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्‍हा ने ट्विट कर कहा है कि पीजी कॉलेज के संस्‍थापक बाबू राजेश्‍वर सिंह के आकस्मिक निधन से उन्‍हें गहरा दु:ख पहुंचा है। गाजीपुर में शिक्षा के प्रचार-प्रसार में उनका अविश्‍मरणीय योगदान रहा है। बाबू राजेश्‍वर सिंह के निधन पर गाजीपुर सिविल बार, कलक्‍ट्रेट बार ने भी न्‍यायिक कार्यों से विरत रहने के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। बाबू राजेश्‍वर सिंह सिविल बार के पूर्व अध्‍यक्ष थे। गाजीपुर श्‍मशान घाट पर बाबू राजेश्‍वर सिंह को मुखाग्नि उनके ज्‍येष्‍ठ पुत्र अमिताभ सिंह ने दी।

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