बलिया: गठबंधन के लोग ‘पस्त’, भाजपाई ‘मस्त’

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गाजीपुर। लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल की हॉट सीट मानी जाने वाली बलिया सीट पर सपा-बसपा गठबंधन अभी तक पत्‍ता नहीं खोली है जबकि भाजपा अपने भदोही सांसद वीरेंद्र सिंह मस्‍त पर दाव लगा दी है। गठबंधन के उम्‍मीदवार की घोषणा विलंबित होने से जहां उसके लोग निराश हैं वहीं भाजपाई खुश हैं। वह मान रहे हैं कि गठबंधन में उम्‍मीदवारी को लेकर चल रही कशमकश से उन्‍हें फायदा मिलेगा। वह अपने चुनाव अभियान के पहले चरण में ही खासी बढ़त बना लेंगे। गठबंधन में बलिया सीट सपा के खाते में है। लिहाजा सपा के शीर्ष नेतृत्‍व को ही उम्‍मीदवार तय करना है लेकिन इसमें हो रही देरी से संभावित उम्‍मीदवार के चेहरे को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। देखा जाए तो अरसे बाद यह नौबत आई है। वैसे पार्टी के राज्‍यसभा सदस्‍य नीरज शेखर अथवा उनकी पत्‍नी डॉ. सुषमा शेखर की उम्‍मीदवारी की ज्‍यादा उम्‍मीद की जा रही है लेकिन अन्‍य दावेदार भी हैं। उनमें पूर्व विधायक सनातन पांडेय तथा वरिष्‍ठ नेता राजीव राय का नाम भी प्रमुख है। बलिया सीट पूर्व प्रधानमंत्री स्‍व. चंद्रशेखर की परंपरागत सीट रही है। चंद्रशेखर के निधन के बाद वर्ष 2008 में हुए उपचुनाव में सपा उनके बेटे नीरज शेखर को उतारी थी। तब उनके अलावा किसी और ने टिकट के लिए दावेदारी नहीं की थी। नीरज शेखर अपने दिवंगत पिता को लेकर उपजी सहानभूति पाकर उपचुनाव जीत गए थे। फिर वर्ष 2009 के आम चुनाव में भी सपा नीरज शेखर को ही टिकट दी। वह दोबारा कामयाब रहे। उस चुनाव में भी पार्टी के भीतर नीरज शेखर की दावेदारी को कोई चुनौती नहीं मिली थी। उसके बाद वर्ष 2014 में भी पार्टी में नीरज शेखर के सामने कोई दावेदार नहीं आया था लेकिन मोदी लहर में वह भाजपा भरत सिंह से काफी वोटों के अंतर से हार गए थे। बावजूद अपने पिता के प्रभाव और सपा मुखिया अखिलेश यादव से याराना ताल्‍लुकात के चलते वह राज्‍यसभा में चले गए। अब फिर लोकसभा चुनाव की बारी आई है। सपा कई माह पहले ही चुनाव लड़ने को इच्‍छुक अपने नेताओं से आवेदन मांगी थी। तब भी नीरज शेखर के आगे कोई नहीं आया था लेकिन बाद में कई दावेदार आ गए। चर्चा है कि यह दावेदार सपा मुखिया अखिलेश यादव को यह समझाने में कामयाब हो गए हैं कि नीरज शेखर को फिर टिकट मिला तो पार्टी का कॉडर उत्‍साहित नहीं रहेगा। दूसरे नीरज शेखर का राज्‍यसभा का कार्यकाल भी डेढ़ साल से अधिक बचा है। मजे की बात नीरज शेखर सहित टिकट के सारे दावेदार लखनऊ में डेरा डाले हैं। अन्‍य दावेदारों के समर्थक डंके की चोट पर अपने टिकट के दावे कर रहे हैं। इधर नीरज शेखर के लोगों में मायूसी बढ़ती जा रही है। उनमें कुछ यह मान रहे हैं कि नीरज शेखर के टिकट की घोषणा में विलंब नाहक नहीं है। कहीं न कहीं पानी मर रहा है। नीरज समर्थकों की इस मायूसी से भाजपाइयों के मन में लड्डू फूट रहें हैं। वह मान रहें हैं कि नीरज शेखर का टिकट कटा तो उनके लोग वीरेंद्र सिंह मस्‍त के पाले में आ जाएंगे। वैसे बलिया के लिए वीरेंद्र सिंह मस्‍त अनजाने नहीं हैं। अव्‍वल तो वह बलिया के मूल निवासी हैं। दूसरे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के निधन के बाद बलिया संसदीय सीट के लिए हुए उपचुनाव में वह भाजपा उम्‍मीदवार के रूप में नीरज शेखर के मुकाबले अपनी जमानत जब्‍त करवा लिए थे।

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