आखिर मनोज सिन्हा ऐसा बोले क्यों

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गाजीपुर । वैसे तो केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा की छवि और वाणी सौम्य, शालीन व सयंमित मानी जाती है लेकिन चुनाव प्रचार अभियान में उन्होंने जिस तरह भाजपा विरोधियों की अंगुलियां काट लेने और आंखें निकाल लेने की बात कही है। उसको लेकर राजनीतिक हलके में हैरानी और तल्ख प्रतिक्रिया हो रही है। हर कोई अपने-अपने स्तर से इस बयान का मतलब निकाल रहा है। श्री सिन्हा को जानने वाले लोगों का मानना है कि उन्होंने ऐसी वाणी अनयास नहीं निकाली है। निश्चित रूप से वह अपने कार्यकर्ताओं के मनोबल को और ऊपर उठाने के लिए ऐसा किया है। उनके जेहन में वर्ष 2004 के संसदीय चुनाव में कार्यकर्ताओं संग हुई हिंसात्मक घटनाएं याद हैं। उस चुनाव में बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी उनसे मुकाबिल थे और इस चुनाव में भी वह श्री सिन्हा के खिलाफ ताल ठोक रहें हैं। इस दशा में श्री सिन्हा अपने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि उस चुनाव के घटनाक्रम फिर दोहराए नहीं जाएंगें। अगर वैसा हुआ तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। लिहाजा कार्यकर्ता नीडर हो कर अपने प्रचार अभियान में डटें रहें। उधर भाजपा का एक खेमा श्री सिन्हा के उस बयान की व्याख्या दूसरे रूप में कर रहा है। उस खेमे का कहना है कि सपा राज में पार्टीजनों पर हुए पुलिसिया जुल्म और उस वक्त अपनी पार्टी के नेताओं की आंख और कानबंदी से नाखुश कार्यकर्ताओं को मनाने वाला यह बयान है। यह कार्यकर्ता इसी चुनाव का इंतजार कर रहे थे। चुनाव अभियान शुरू होने  के साथ ही इन कार्यकर्ताओं में सपा राज में पार्टी के भीतर खुद की बेकदरी की बात उठने लगी थी। उधर सपा-बसपा गठबंधन मनोज सिन्हा के उस बयान को अपने अंदाज में ले रहा है। गठबंधन के नेताओं का कहना है कि श्री सिन्हा का यह बयान चुनाव मैदान में उनकी हताशा और बौखलाहट को दर्शाता है।

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