…तब यादवों पर टिका है चुनाव परिणाम!

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गाजीपुर। पक्ष-विपक्ष के लिए गाजीपुर संसदीय सीट अहम बन गई है। जहां भाजपा अपने उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के प्रगतिशील गाजीपुर के नारा को बेजोड़ साबित करने में लगी है। वहीं विरोधी बसपा-सपा गठबंधन भाजपा के इस मिथक को तोड़ने में लगा है कि गाजीपुर में जीत का मतलब केंद्र में उसकी सरकार पक्की। गठबंधन के दोनों घटक बसपा और सपा के अपने खुद के भी मकसद हैं। बसपा दशकों बाद दोबारा साथी बनी सपा के आधार के बूते पहली बार इस सीट पर अपना झंडा फहराने की जुगत में लगी है  और सपा पिछले चुनाव में मोदी लहर में भाजपा के हाथों हुई अपनी हार का बदला लेना चाहती है। हालांकि पिछले चुनाव में सपा कांटे की टक्कर दी थी लेकिन वोटों के बिखराव में उसे मामूली वोटों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा था।

गाजीपुर सीट यादव बाहुल्य सीट है। गाजीपुर में भी यादव सपा के परंपरागत वोटर माने जाते हैं। गठबंधन के तहत सपा गाजीपुर सीट बसपा के लिए छोड़ दी है। बसपा इस सीट को साधने के लिए घाघ चुनाव लड़वइया और धाकड़ नेता पूर्व सांसद अफजाल अंसारी को मैदान में उतारी है। इस दशा में यादव वोट निर्णायक हो गया है। वैसे यादव वोट को लेकर गठबंधन इत्मीनान में है लेकिन भाजपा बैचेन है। वह यादवों को उनकी निजी समस्या या सपा में एक परिवार विशेष के दखल और विकास के मुद्दे के जरिये उन्हें रिझाने की भरसक कोशिश में है।

बसपा से भाजपा में आए वरिष्ठ नेता संतोष यादव कहते हैं-अव्वल तो यादवों को पता है कि केंद्र में गठबंधन की सरकार नहीं आने वाली है। सपा मुखिया अखिलेश यादव प्रधानमंत्री भी नहीं बनेंगें। यह लोकसभा का चुनाव है। आखिर में चाहे जैसे भी हो नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बनेंगे और गाजीपुर से मनोज सिन्हा फिर सांसद चुने जाते हैं तो मोदी जरूर इस बार इन्हें कैबिनेट मंत्री बनाएंगे। न सिर्फ यह गाजीपुर के लिए गौरव की बात होगी। बल्कि गाजीपुर का चतुर्दिक विकास भी अनवरत जारी रहेगा। तब यह भी तय है कि गाजीपुर का यादव समाज विकास को रोकने का कारण नहीं बनेगा। इसका कलंक अपने माथे वह नहीं लेना चाहेगा। इस मसले पर यादव समाज का नौजवान कुछ ज्यादा ही संजीदा है।  उधर गठबंधन के उम्मीदवार अफजाल अंसारी के चुनाव प्रबंधन से जुड़े शिव कुमार राय कहते हैं कि यादव समाज गठबंधन के खिलाफ हरगिज़ नहीं टूटने वाला है। अपनी बात की पुष्टि में वह एक वाकया बताते हैं। बात उस दिन की है जिस दिन भाजपा उम्मीदवार मनोज सिन्हा ने नामांकन किया। उनका रोड शो देखने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे यादव समाज के एक अधिवक्ता ने चाय की दुकान में बैठते कहा कि  इस वक्त भाजपा के लोग यादव समाज की खूब कद्र कर रहे हैं। यहां तक कि समाज के किसी भी व्यक्ति को वह यादवजी कह कर संबोधित कर रहे हैं। आदर के साथ अपने पास बैठा रहे हैं जबकि चुनाव बाद वह फिर से समाज को अहिर कह कर गरियाने लगेंगे। गाजीपुर शहर के झुन्नू लाल चौराहा के रहने वाले पप्पू यादव कहते हैं- भाजपा ने नौजवानों के लिए कुछ नहीं किया। रोजगार का वादा करके भी इसकी सरकार नौजवानों को रोजगार नहीं दी। यहां तक कि गाजीपुर में सपा के राज में सेना भर्ती मेला लगा लेकिन भाजपा ने इस मेले की जरूरत नहीं समझी।

पर, एक बात आम सपाई भी गौर कर रहा है। यह पहला मौका है कि इस चुनाव में सपा की बैठकों, कार्यक्रम में वह कार्यकर्ता और नेता दिख नहीं रहे हैं, जो पिछले चुनावों के वक्त पूरे उल्लास, उत्साह में दिखते थे। कारण चाहे पार्टी का चुनाव निशान साइकिल का न होना हो या उनकी खुद की व्यस्तता। वैसे सपा संगठन से जुड़े नेता इस बात को सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि यह सब भाजपा का दुष्प्रचार है। हकीकत यह है कि गठबंधन को लेकर यादवों में करेंट है। सपा के वरिष्ठ नेता मुन्नन यादव कहते हैं कि भाजपा धनवानों की पार्टी है। यादव समाज को अपनी ओर करने के लिए वह हर हथकंडा अपना रही है। यादव समाज के गरीबों को खरीदने की भी कोशिश की जा रही है लेकिन भाजपा कुछ भी कर ले। यादव उसके साथ जाने वाले नहीं हैं। यादव बिकने वाला समाज नहीं है और यह तय है कि गठबंधन उम्मीदवार अफजाल अंसारी इस बार भाजपा उम्मीदवार व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को पांच लाख वोटों के अंतर से हराएंगे।

यादव बिरादरी के एक अन्य वरिष्ठ नेता अपनी पहचान न बताने की शर्त पर कहते हैं-गाजीपुर में संसदीय चुनाव अभियान का एक दूसरा पहलू भी है। य़ह पहली बार है कि गाजीपुर के इस चुनाव अभिय़ान में य़ादव समाज की समस्य़ा मुद्दा नहीं है। वजह गठबंधन यह मान रहा है कि यादव उसकी खुद की प्रापर्टी है। उधर भाजपा शुरू से यादवों को अपने से दूर मानती रही है लेकिन  किसान मोर्चा के प्रदेश मंत्री डॉ. विजय यादव इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। कहते हैं- भाजपा सबका साथ-सबका विकास की बात करती है। रही बात भाजपा पर यदुवंशी समाज को ही टारगेट करने की तो यह बेमानी है। भाजपा ऐसा क्यों करेगी। भारत के नवनिर्माण को लेकर उसके पास अपना एजेंडा है। अपना एक विजन है। फिर पार्टी उम्मीदवार मनोज सिन्हा के पांच साल में गाजीपुर के लिए किए गए विकास कार्यों की लंबी फेहरिस्त है। एक बात और। यदुवंशी स्वावलंबी, स्वाभिमानी होते हैं। उन्हें सम्मान और आदर से तो अपने वश में किया जा सकता है लेकिन लोभ, भय दिखाकर कोई भी उनको अपनी ओर नहीं मोड़ सकता।

खैर गाजीपुर के यदुवंशी इस चुनाव में किस भूमिका में रहेंगे। यह नतीजा बताएगा लेकिन यह जरूर है कि पूरे चुनाव अभियान में चुनाव विश्लेषकों की इसी समाज पर निगाह लगी रहेगी। गाजीपुर संसदीय क्षेत्र में यादव वोटरों की संख्या साढ़े तीन लाख से अधिक मानी जाती है और चुनावी राजनीति के प्रेक्षकों की मानी जाए तो पिछले चुनाव में इनका करीब 60 फीसद वोट पड़ा था।

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