अफजाल अंसारी के दूत पहुंचे नैनी जेल

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गाजीपुर। कई दशक बाद यह पहला मौका है कि जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन अरूण सिंह गाजीपुर संसदीय क्षेत्र के चुनाव अभियान में सशरीर शामिल नहीं हैं, लेकिन उनके खुद के जनाधार और प्रभाव इस चुनाव अभियान में भी अपनी अहमियत बनाए रखे हैं। शायद यही वजह है कि प्रमुख दलों के उम्‍मीदवार उनके समर्थन की न सिर्फ चाहत रखे हैं, बल्कि इसके लिए वह प्रयासरत भी हैं। खबर है कि सपा-बसपा गठबंधन के उम्‍मीदवार अफजाल अंसारी के दूत गुरुवार को नैनी केंद्रीय जेल में पहुंचे थे। जहां एक हत्‍या के मामले में अरूण सिंह निरुद्ध हैं। अरूण सिंह के एक करीबी के मुताबिक अरूण सिंह से जेल में मुलाकात कर अफजाल अंसारी का पैगाम उन तक पहुंचाया। अरूण सिंह के उस करीबी ने यह बताने में असमर्थता जताई कि अफजाल अंसारी के पैगाम पर अरूण सिंह ने अपना क्‍या निर्णय लिया। अलबत्‍ता, करीबी ने यह जरूर बताया कि अफजाल अंसारी के उस दूत से अरूण सिंह ने अपना गिला-शिकवा सुनाया। वह यहां तक कहे कि अफजाल अंसारी पहली बार सन् 1985 में मुहम्‍मदाबाद विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे, तब उन्‍होंने उनकी खुलकर मदद की थी, लेकिन जब वह खुद विधानसभा चुनाव लड़े तब अफजाल अंसारी ने उनका विरोध किया था। उसके बाद भी कई मौके  आए जब अफजाल अंसारी और उनके भाइयों ने मुखालफत की। अरूण सिंह का जवाब लेकर दूत नैनी जेल से लौट गया था। मालूम हो कि अरूण सिंह के समर्थक छह मई को बकायदा अग्रवाल पैलेस में बैठक कर चुनाव में किसी उम्‍मीदवार को समर्थन पर चर्चा किए थे। बैठक के आखिर में तय हुआ था कि समर्थन का फैसला अरूण सिंह के जिम्‍मे छोड़ दी जाए। हालांकि अरूण सिंह की ओर से इस बाबत उनके समर्थकों तक फिलहाल कोई फैसला नहीं पहुंचा है। इस बीच एक घटनाक्रम यह जरूर हुआ है कि अरूण सिंह के प्रतिनिधि गौतम मिश्र से गठबंधन उम्‍मीदवार अफजाल अंसारी की मुलाकात हुई। वैसे इस मुलाकात को अरूण सिंह के करीबी गौतम मिश्र की उनकी खुद की निजी मुलाकात बता रहे हैं।

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