भीड़ के हिसाब से मोदी को पीछे छोड़ दी गठबंधन की रैली!

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गाजीपुर। अगर भीड़ पैमाना है तो निश्चित रूप से सपा-बसपा-रालोद गठबंधन गाजीपुर में भाजपा पर भारी है। सोमवार को आरटीआई मैदान में गठबंधन की रैली की भीड़ दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली की भीड़ को बहुत पीछे छोड़ दी। भीड़ से गठबंधन के नेता भी गदगद थे। बसपा मुखिया मायावती ने कहा कि गठबंधन के नेताओं को सुनने के लिए इस रैली में लाखों लोग जुटे हैं। यह आपार भीड़ और इस भीड़ के जोश से ऐसा लग रहा है कि गाजीपुर के लोग नमो-नमो वालों की जरूर छुट्टी करने वाले हैं और जय भीम वालों को लाने वाले हैं। भीड़ की यह इच्‍छा जरूर पूरी होगी। मायावती के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी भीड़ का जिक्र किया। रैली स्‍थल पर लगे पंडाल की ओर इशारा करते हुए उन्‍होंने कहा कि यह पंडाल शुरू से लेकर आखिर तक भरा पड़ा है। पंडाल के बाहर भी लोग मौजूद हैं। इनके चेहरे पर मुस्‍कान और जोश यह बता रहा है कि इस बार चुनाव में गाजीपुर से गठबंधन है। इसी क्रम में अखिलेश बोले- हमें तो लगता था कि आजमगढ़ में ज्‍यादा जोश है, लेकिन यह लगता है कि आजमगढ़ को भी गाजीपुर पीछे छोड़ दिया है। यह मान लें कि लाखो वोट से जीतकर जा रहा है गठबंधन। अखिलेश यादव ने दो दिन पहले इसी मैदान में प्रधानमंत्री की हुई रैली की ओर इशारा करते हुए कहा- हमें लगता है कि उनकी (प्रधानमंत्री) सभा का हमने आज सफाया कर दिया। फिर उन्‍होंने अपनी बात को और स्‍पष्‍ट करते हुए कहा- दो ही दिन हुए हैं, दो ही दिन में उनका सफाया हो गया और अभी तो हमें 19 मई (मतदान) तक इंतजार करना है।

रालोद मुखिया चौधरी अजीत सिंह तो भीड़ देखकर चुनाव परिणाम भी बता दिए। कहे- क्‍या भीड़ है और क्‍या जोश है। फिर उन्‍होंने गठबंधन उम्‍मीदवारों गाजीपुर के अफजाल अंसारी और बलिया के सनातन पांडेय का नाम लेते हुए कहे कि आप लोग चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन मुझे आप से प्रार्थना करनी है, रैली में जहां बसपा मुखिया मायावती के निशाने पर भाजपा सहित कांग्रेस रही। वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव अपने चीर परिचीत अंदाज में प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ पर निशाना साधे। जबकि रालोद मुखिया ने अपने चुटीले अंदाज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमलावर रहे। भाजपा के हर-हर मोदी के नारे के जवाब में वह अपना गढ़ा नारा बोले- हॉय-हॉय मोदी, बॉय-बॉय मोदी। वैसे सपा मुखिया अखिलेश यादव ही महफिल लूटे। वह जैसे ही बोलने के लिए माइक पर पहुंचे उपस्थित जनसमूह उल्‍लास, उत्‍साह से भर उठा। उन्‍होंने भी गाजीपुर व बलिया संसदीय सीट के गठबंधन उम्‍मीदवार अफजाल अंसारी तथा सनातन पांडेय का नाम लेकर उन्‍हें जिताने की अपील की। मौजूद जनसमूह ने भी सस्‍वर उनकी बात पर सहम‍ति जताई। बल्कि अफजाल अंसारी को लेकर अखिलेश यादव ने अपने कॉडर को बताना चाहा कि वह उनके लिए भी अहम हैं। उन्‍होंने अफजाल का नाम लेते वक्‍त उसके आगे जी लगाया। उसके पहले बसपा प्रमुख मायावती ने भी अफजाल अंसारी का नाम लेते हुए कहा कि उनकी छवि को लेकर तमाम तरह की बातें होती हैं, लेकिन हकीकत यही है कि भाजपा माफियाओं से भरी पड़ी है। गौर करने की बात यह रही कि रैली में विकास का मुद्दा गठबंधन नेतृत्‍व समूह के किसी नेता ने नहीं उठाया। उन नेताओं के आने से पहले बैठने के सवाल को लेकर सपा-बसपा कार्यकर्ता भिड़ गए, लेकिन गठबंधन के स्‍थानीय नेताओं ने किसी तरह उन्‍हें समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया। रैली में मंच पर बसपा के राष्‍ट्रीय महासचिव सतीष चंद्र मिश्र तथा पार्टी मुखिया मायावती के भतीजे आकाश आनंद के अलावा गठबंधन उम्‍मीदवार गाजीपुर के अफजाल अंसारी व बलिया के सनातन पांडेय के और सपा के विधायक द्वय डॉ. वीरेंद्र यादव व सुभाष पासी सहित पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह, पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह, जिलाध्‍यक्ष डॉ. नन्‍हकू यादव, जिला पंचायत चेयरमैन आशा यादव, पूर्व एमएलसी विजय यादव और बसपा के विधायक उमाशंकर सिंह, पूर्व विधायक सिबगतुल्‍लाह अंसारी, डॉ. राजकुमार गौतम, उमाशंकर कुशवाहा, पूर्व मंत्री विजय मिश्र, अब्‍बास अंसारी आदि थे। रैली में जुटी भीड़ से गठबंधन के गाजीपुर के नेता और कार्यकर्ता भी कम खुश नहीं हैं। सपा के वरिष्‍ठ नेता मुनन्‍न यादव का दावा है कि रैली में कम से कम दो लाख की भीड़ थी। उन्‍होंने यह भी कहा कि रैली गठबंधन उम्‍मीदवार अफजाल अंसारी के लिए सपा मुखिया अखिलेश यादव के बाबत भाजपा की ओर से फैलाए जा रहे भ्रम पर भी पूर्ण रूप से विराम लगा दी। उधर प्रशासन की स्‍थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) की रिपोर्ट है कि गठबंधन की रैली में 70-80 हजार की भीड़ थी। उधर भाजपा के लोगों का कहना है कि गठबंधन की रैली में जुटी भीड़ का आकलन का आधार बिल्कुल गलत है। अव्वल तो हकीकत यह है कि रैली तीन दलों के गठबंधन की थी। दूसरे रैली में जुटी भीड़ दो संसदीय क्षेत्र की थी। फिर रैली में सपा-बसपा कार्यकर्ताओं में मारपीट की घटना भी सामान्य नहीं है। यह घटना साबित करती है कि गठबंधन के नेता सत्ता स्वार्थ में भले मिल गए हैं लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं को उनका यह बेमेल गठबंधन कतई कबूल नहीं है।

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