हिंदी साहित्य के बड़े नाम थे हरिवंश राय बच्चन-हरिवंश राय बच्चन

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गाजीपुर–अखिल भारतीय कायस्थ महासभा गाजीपुर के तत्वाधान में महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव के चंदन नगर स्थित आवास पर महाकवि हरिवंश राय बच्चन जी की पुण्यतिथि पर माल्यार्पण कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी आयोजित हुई ।
गोष्ठी में अपने विचार रखते हुए महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बच्चन जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चन जी हिंदी साहित्य के बड़े नाम और हिंदी साहित्य से आमजन को परिचित कराने वाले कवि थे ।उन्होंने श्री बच्चन की मधुशाला की कुछ पंक्तियों को उदाघृत किया| “मदिरालय जाने को घर से चलता है पीने वाला,किस पथ से जाऊं? असमंजस में है भोलाभाला ! अलग-अलग पथ बतलाते सब,पर मैं यह बतलाता हूं,अलग-अलग पथ बतलाते सब,पर मैं यह बतलाता हूं,|

वह मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन जी के पिता थे । उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के बाद विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ के पद पर रहकर सरकार की सेवा किया। साहित्य के क्षेत्र से वह राज्यसभा भी भेजे गए ।वह अपनी सबसे मशहूर प्रसिद्ध रचना मधुशाला की वजह से काफी लोकप्रिय हुए ।कभी शराब को हाथ न लगाने वाले बच्चन जी ने मधुशाला लिखी ।सन् 1968में बच्चन जी को “दो चट्टानें” की कविता के लिए साहित्य अकादमी के पुरस्कार से सम्मानित किया गया । बच्चन जी आज भी मधुशाला की वजह से आमजन के दिल में रचते बसते है ।

इस गोष्ठी में मुख्य रूप से मुक्तेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव, पियूष श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव, शैल श्रीवास्तव,अमर सिंह राठौर, राजेश श्रीवास्तव, अमरनाथ श्रीवास्तव, संदीप वर्मा, आदि उपस्थित थे। इस गोष्ठी का संचालन जिला महामंत्री अजय कुमार श्रीवास्तव ने किया

 

 

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