जंगीपुर में डा. विरेंद्र को अपना ताज बचाने की चुनौती

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गाजीपुर। वैसे तो गाजीपुर में सात विधान सभा हैं। उनमें जंगीपुर विधान सभा क्षेत्र में भाजपा को छोड़ कर  बसपा व सपा ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए।। यहां तक कि पूर्व राज्य मंत्री के उत्तराधिकारी ,वर्तमान विधायक  डा. वीरेंद्र कुमार भी हाईकमान के आश्वासन के बावजूद अपने टिकट के डिक्लेरेशन के लिए राजधानी में डेरा डाले हुए थे।गुरुवार को सपा ने आख़िरकार काफ़ी जद्दोजहद के बाद गाजीपुर की दो विधान सभाओं के अपने प्रत्यासी घोषित कर दिया।इसमें जंगीपुर विधान सभा के उम्मीदवार का नाम चौंकाने वाला नहीं है।जबसे यह विधान सभा अस्तित्व में आई है ,यहां के विधायक डा.वीरेंद्र सिंह यादव के परिवार का ही वर्चस्व रहा है।इस विधान सभा के पहले विधायक स्व.कैलाश यादव थे।वे अपने कार्यकाल में दो मंत्रालय सम्हाल चुके थे।दुर्भाग्य से 9 फरवरी 2016 को उनकी असमायिक मौत के बाद हुए उप चुनाव में उनकी पत्नी किस्मतिया देवी विधायक बनी|किस्मतिया देवी को 82316 मत मिले जबकि कुंवर रमेश सिंह को 60224 मतों से संतोष करना पड़ा।सपा और भाजपा दोनों ही आमने सामने थे।बसपा चुनाव में ख़ुद को बाहर रखी थी। जैसा उसकी परंपरा है कि वह किसी भी उप चुनाव में भाग नहीं लेती।बसपा के मतदाता अपनी पार्टी का उम्मीदवार न पाकर अधिकांश ने सपा के पक्ष में अपना विश्वास जताया।देखा जाय तो उस चुनाव में अगर बसपा का उम्मीदवार रहा होता तो सपा की राह इतनी आसान नहीं होती।2017के विधान सभा चुनाव में  सपा ने डा. वीरेंद्र कुमार पर दाव लगाया।भाजपा ने बैकवर्ड कार्ड खेलते हुए रामनरेश कुशवाहा को मैदान में उतारा। । रामनरेश कुशवाहा को हार का मुंह देखना पड़ा।वह मात्र 3239मतों से चुनाव हार गए। डॉ वीरेंद्र सिंह यादव को 71441मत मिले थे। चुनाव परिणाम को देखने के बाद सबका कहना था की इं.मनीष पांडे की ओर सवर्ण जातियों की लामबंदी ने सपा के विजय को आसान बना दिया।लेकिन इस बार बसपा उम्मीदवार डॉ.मुकेश सिंह के मैदान में आ जानें से जंगीपुर विधान सभा का चुनाव काफी रोचक बन गया है।जबकि भाजपा ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।भाजपा के अंदरखाने की बात माने तो पार्टी यहां बैकवर्ड उम्मीदवार उतारने के मूड में है।इसका कारण यहां का जातिगत आंकड़ा है।नई विधानसभा परिसीमन के बाद 2012 में अस्तित्व में आई।इस विधानसभा में अनुसूचित जाति के अलांवा यादव,कुशवाहा, वैश्य,राजभर,मुस्लिम और ब्राम्हण के मत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।लेकिन सवर्णों की भूमिका से कोई इंकार नहीं कर सकता।इसका उदाहरण किस्मतियादेवी के चुनाव में स्पष्ट देखा जा सकता है।जब सपा और भाजपा दोनों ही आमने सामने थे। डॉ वीरेंद्र सिंह यादव को 71441मत मिले थे।जबकि बसपा के इं मनीष पांडे को62744 मत मिले। निश्चित रूप से उनके स्वजातीय मतदाताओं में अधिकांश उनके पक्ष में वोट कास्ट किया।इस विधान सभा में कुल मतदाताओं की संख्या 3 लाख 11हजार 256है। इसमें महिला मतदाता 1लाख 42हजार 230 है। इनमें अनुमानतः अनुसूचित 66हजार,यादव 61,कुशवाहा24,वैश्य 21, मुस्लिम 16, ब्राह्मण 16 हजार के अलांवा शेष सवर्ण व अन्य जातियां हैं।अब देखना दिलचस्प होगा कि इस बार के चुनाव में ऊट किस पार्टी के पक्ष में बैठता है।

 

जंगीपुर विधानसभा 2017 का परिणाम

कुल मतदाता….346551
पड़े मत…214622
मतदान प्रतिशत…61.93%
विजेता….वीरेंद्र यादव..33.39
दूसरा स्थान ..रामनरेश कुशवाहा ….31.78%
मनीष पांडेय ….31.32%
मनोज(भाकपा)….1.33%
अजीत प्रताप (जन अधिकार पार्टी)…0.69
निलभ सिंह(रालोद)…0.64%
राजेंद्र(निर्दल)….0.37
सत्यदेव यादव (लोकदल)…0.28

राजनीतिक पार्टियों की नज़र में जातिगत आंकड़ा
भाजपा
यादव 52हज़ार के अतिरिक्त अनु. जाति 54,राजभर 16,राजपूत47,मुस्लिम 12,कुशवाहा 7,मल्लाह 4चौहान 9,वैश्य 20 ब्राम्हण 12,पाल 4.5,कुम्हार 3, गोंड 6, कश्यप 1.75 और कायस्थ 2 हज़ार हैं।
सपा
यादव 65हजार और अनु. जाति 52,राजभर 24,राजपूत 18,मुस्लिम 18, कुशवाहा 15,बिंद 13, मल्लाह 4, चौहान 11,वैश्य 11.5, ब्राम्हण 11.5, विश्वकर्मा 5, पाल 4, बरई 2,कुम्हार 4, गोड़ 1.5, खरवार 2, कश्यप 1.5, कायस्थ 1.5 तथा अन्य 6 हज़ार हैं।
यादव 44 हज़ार व अनु. जाति 69के अलांवा राजपूत 14.5, ब्राम्हण 31.5, वैश्य 11, कुशवाहा 16.75, राजभर 23, गोंड 4, खरवार 5, बिंद 17, चौहान 12, भूमिहार 11, कायस्थ 2.15, विश्वकर्मा और कुम्हार 5,5 हज़ार हैं।

बसपा
यादव 44 हज़ार व अनु. जाति 69के अलांवा राजपूत 14.5, ब्राम्हण 31.5, वैश्य 11, कुशवाहा 16.75, राजभर 23, गोंड 4, खरवार 5, बिंद 17, चौहान 12, भूमिहार 11, कायस्थ 2.15, विश्वकर्मा और कुम्हार 5,5 हज़ार हैं।

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