अखिलेश यादव ने बसपा के नवनिर्वाचित सांसद अफजाल को दी अहमियत

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गाजीपुर। सियासत में वक्त के साथ सब कुछ बदलता रहता है। एक वक्त था जब सपा मुखिया अखिलेश यादव अंसारी बंधुओं की साया भर से तोबा करते थे, लेकिन बेशक अब यह बीते दिनों की बातें हो चुकी हैं। यह बात मंगलवार को फिर पोख्ता हुई। वह भी तब जब बसपा मुखिया मायावती सपा से गठबंधन तोड़ने का फैसला कर चुकी थीं। अखिलेश यादव अपनी पार्टी के दिवंगत जिला पंचायत सदस्य विजय यादव पप्पू को श्रद्धाजंलि देने उनके घर करंडा क्षेत्र स्थित सलारपुर(गोशंदेपुर) पहुंचे थे। वहां सपाइयों की भीड़ में नवनिर्वाचित सांसद अफजाल अंसारी भी शामिल थे। सपाइयों संग वह भी अखिलेश यादव की अगुवानी किए।

अखिलेश यादव पप्पू यादव के परिवारीजनों से मिल कर शोक संवेदना जताने के लिए उनके घर के अंदर पहुंचे। वहां मौजूद पार्टीजनों के बीच अफजाल अंसारी को न पाकर अखिलेश यादव पूछे-सांसदजी कहां रह गए। तब अफजाल अंसारी को अंदर बुलवाया गया। अंदर आए अफजाल को अखिलेश सादर बैठने को कहे। फिर चर्चा चली पप्पू यादव की। अफजाल बताए कि पप्पू यादव चुनाव में काफी मेहनत किए थे। उनके बूते इलाके के सैकड़ों बूथ कब्जा होने से बच गए थे। इसी से चिढ़ कर सामंतवादियों ने उनकी हत्या कर दी। अफजाल की इस बात को अखिलेश यादव गौर से सुने। हालांकि अफजाल की सामंतवादी वाली बात को पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह काटे। बोले-यह सामंतवादी नहीं पेशेवर अपराधियों की करतूत है और उन्हें मौत की सजा मिलनी चाहिए। विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव बताए कि पप्पू यादव पार्टी के लिए कितने वफादार,  ईमानदार थे और उनसे उनका कितना लगाव था।

खैर मूल बात पर आया जाए। अखिलेश यादव और अफजाल अंसारी। याद किया जाए बीते लोकसभा चुनाव के अभियान के दौर को। तब यह बात जोर-शोर से चलाई गई थी कि अफजाल के लिए अखिलेश यादव कतई नहीं आएंगे लेकिन अखिलेश यादव आए। बसपा मुखिया मायावती और रालोद मुखिया अजीत चौधऱी संग अफजाल के समर्थन में चुनावी रैली को संबोधित भी किए थे।

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