सपा-बसपा गठबंधन टूटने से असहज हैं कार्यकर्ता, नेता!

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गाजीपुर। बसपा मुखिया मायावती के अपने एकतरफा फैसले में सपा संग गठबंधन तोड़ेने से सपा मुखिया अखिलेश यादव पर खुद क्या गुजरी होगी। यह तो वही जानते होंगे। लेकिन, मायावती का यह कदम सपा के नीचे के कार्यकर्ताओं को एकतरह से निरुत्तर करके रख दिया है। इसको लेकर चट्टी-चौराहों पर विरोधियों की ओर से दागे जा रहे तीखे जुबानी वाण के हमले उन्हें तिलमिला कर रख दे रहे हैं। उन हमलों का उन्हें कोई ढंग का जवाब भी नहीं सुझ रहा है। यह वही कार्यकर्ता हैं, जब गोरखपुर, फूलपुर और कैराना संसदीय सीटों के उप चुनावों में गठबंधन की नींव पड़नी शुरू ही हुई थी कि उनके दिलों में बसपा के लिए पूरी जगह बन चुकी थी। वह बसपाजनों को राजनीतिक के साथ ही सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा भी मुहैया कराने लगे थे। बदले में बसपा के लोग भी खेतीबारी या अन्य उद्यम में हाथ बंटाने में सपाजनों को प्राथमिकता देने लगे थे। मतलब, सपा-बसपा गठबंधन की औपचारिक घोषणा से पहले ही दोनों पार्टियों के नीचे के कार्यकर्ताओं के दिल मिल चुके थे।

गौर किया जाए तो `बहनजी` के इस फैसले से खुद बसपा के भी कार्यकर्ता खुश नहीं हैं। जमानियां विधानसभा क्षेत्र के बसपा के एक सेक्टर प्रभारी ने अपनी पहचान न देने की शर्त पर कहा कि बहनजी का यह फैसला सरासर गलत है। यादव समाज की दगाबाजी की उनकी बात भी झूठी है। हकीकत यह है कि यादव समाज सपा मुखिया अखिलेश यादव के आदेश-निर्देश के तहत पूरी ईमानदारी से बसपा उम्मीदवारों को वोट किया। यही वजह रही कि गाजीपुर और घोसी में बसपा की शानदार जीत दर्ज हुई।

बसपा मुखिया के फैसले ने उन नेताओं, कार्यकर्ताओं को भी असहज कर दिया है, जो कभी सपा में थे और किन्हीं कारणों से मजबूर होकर अब वह बसपा में हैं। दरअसल गठबंधन के बाद लोकसभा चुनाव अभियान के वक्त उनको सपा के पूर्व साथियों संग पहले की तरह जनसंपर्क, बैठक, सभा में हिस्सेदारी करने, चुनावी रणनीति बनाने और सपा दफ्तर में ससम्मान आने-जाने का मौका मिलने लगा था। बेशक एक तरह से उन्हें घर वापसी जैसा एहसास होने लगा था। हालांकि गठबंधन टूटने के सवाल पर सार्वजनिक तौर पर वह कुछ नहीं बोल रहे हैं।

गाजीपुर के नवनिर्वाचित सांसद अफजाल अंसारी चुनाव अभियान के वक्त अपनी पार्टी बसपा के मोहनपुरवा स्थित कार्यालय पर जितनी मर्तबा गए होंगे, शायद उतनी ही बार वह सपा कार्यालय लोहिया भवन पर भी पहुंचे होंगे। याद करें कि अफजाल अंसारी पहली बार वर्ष 2004 में गाजीपुर से सपा के ही टिकट पर सांसद चुने गए थे। कमोबेश यही स्थिति बलिया में दिखी। बसपा नेता अंबिका चौधरी चुनाव अभियान के वक्त बलिया में सपा के जिला मुख्यालय में कई बार उसी उल्लास, उमंग में दिखे, जैसे कि पहले दिखते थे। वह कई बार सपा की प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं, लेकिन सपा में लगातार उपेक्षा के चलते बीते विधानसभा चुनाव के वक्त वह बसपा में चले गए थे।

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