बेटी की डोली से पहले उठी बाप की अर्थी

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गाजीपुर। यह दर्दनाक कहानी है। एक बेटी की डोली उठने से पहले उसके बाप की अर्थी उठी। कहानी नंदगंज थाने के हकीमपुर (सोनठी) गांव की है। गुरुवार को रघुबर बिंद (40) की बेटी अनिता की शाम को बारात आनी थी। रघुबर अपने तीनों बेटे अरविंद, गोविंद तथा कमलेश संग तैयारी में जुटे थे। सुबह बारात को ठहरने के लिए तय जगह को समतल करना था। इसके लिए ट्रैक्टर में रोटावेटर लगा कर एक बेटा उस जगह पर पहुंचा लेकिन अपनी तसल्ली के लिए रघुबर ट्रैक्टर रोकवाए और यह काम खुद करने के लिए कहे। बेटा ट्रैक्टर से उतर गया। दुर्भाग्य था कि वह ट्रैक्टर को गेयर में ही छोड़ कर उतर गया। तभी अचानक मय रोटावेटर ट्रैक्टर चल पड़ा और रघुबर उसकी चपेट में आ गए। फिर तो रोटावेटर उनके शरीर को दो टुकड़े में कर दिया। घर में कोहराम मच गया।

इसकी सूचना अनीता के ससुराल पक्ष को मिली। वह अपना मानवीय पक्ष दिखाए। कुछ ही देर बाद मय दूल्हा हरिनारायण बिंद को लेकर रघुबर के घर पहुंचे छुतका से बचने के लिए शवदाह से पहले सिंदूरदान की रश्म पूरा करा कर वह सभी अपने घर रामपुर बंतरा लौट गए। पोस्टमार्टम के बाद रघुबर का श्मशान घाट पर दाह संस्कार हुआ।

इसकी जानकारी होने पर सबसे पहले जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन अरुण सिंह के बेटे राज ठाकुर पहले पोस्टमार्टम हाउस के बाद रघुबर के घर सोनठी गए और परिवारीजनों को ढांढस देते हुए कहे कि अरुण सिंह की नामौजूदगी में उनके लोग इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी नाथ से पीड़ित परिवार को किसान बीमा योजना के तहत दस लाख रुपये और प्रधानमंत्री आवास मुहैया कराने का आग्रह किया। इस मौके पर गांव के बिंद समाज के लोगों का कहना था कि भाजपा की स्वजातीय विधायक होने के बावजूद डॉ.संगीता बलवंत समाज के सुख-दुख में शायद आती हैं। इस पर राज ठाकुर ने कहा कि यह विधायक का अपना मामला है पर यह जरूर है कि बिंद समाज के लिए उनके नेता अरुण सिंह के दिल में खास जगह है। राज ठाकुर के साथ अरुण सिंह के समर्थक ज्ञानेंद्र सिंह प्रधान, ज्ञानेंद्र सिंह बबलू, आसीफ खां, लोहा सिंह, रामशब्द सिंह, पप्पू पटेल, रमेश बिंद, कल्तू बिंद आदि थे।

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