निरहुुआ नहीं छोड़ेगा आजमगढ़, अपना झंडा फहराने का स्मृति ईरानी से लिया टिप्स

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गाजीपुर। भोजपुरी सिने स्टार एवं भाजपा नेता दिनेश यादव निरहुआ आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र से ‘यादव परिवार’ को उखाड़ फेंकने के लिए पूरा जोर लगाएगा। इसके लिए वह आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र में पूरा वक्त देगा। अपनी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और विकास कार्य उसकी प्राथमिकता में होंगे।

सोशल मीडिया के जरिये निरहुआ ने गुरुवार को कुछ ऐसा ही संकेत दिया। दिल्ली पहुंचकर वह अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पहली बार हार का स्वाद चखाने वाली केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से मिला और उनसे आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र से अगले चुनाव में अपनी जीत दर्ज कराने का टिप्स लिया। उनके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री डॉ.महेंद्र नाथ पांडेय सहित केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, रतनलाल कटारिया व पीयूष गोयल, नरेंद्र सिंह तोमर वगैरह से भी निरहुआ मिला। उन लोगों से भी वह आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र के विकास को लेकर विस्तार से चर्चा किया। केंद्रीय मंत्रियों संग मुलाकात की उसने अपनी फोटो भी सोशल मीडिया पर शेयर की है।

निरहुआ के करीबियों की मानी जाए तो केंद्रीय मंत्रियों ने मुलाकात में निरहुआ में काफी दिलचस्पी दिखाई और उसके आग्रह पर आजमगढ़ के विकास का पक्का भरोसा दिया। खासकर स्मृति ईरानी ने निरहुआ से आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र के चुनावी समीकरण और नतीजे की जानकारी ली। अमेठी में अपनी ऐतिहासिक जीत की चर्चा करते हु्ए स्मृति ईरानी बताईं कि वह किस मुद्दे और रणनीति से कांग्रेस के अभेद दुर्ग को फतह कीं। निरहुआ को सुझाईं कि उन्हें भी आजमगढ़ के लिए कुछ ऐसा ही करना होगा।

मालूम हो कि निरहुआ को बीते संसदीय चुनाव भाजपा आजमगढ़ से सपा मुखिया अखिलेश यादव के खिलाफ अपना उम्मीदवार बनाई थी। उनके समर्थन में चुनावी सभा करने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंचे थे। भाजपा के लिए एकदम बंजर मानी जाने वाली आजमगढ़ की जमीन पर निरहुआ ने चुनाव अभियान में अपनी मेहनत और शोहरत से भाजपा की फिजा बना दी थी। बावजूद निरुहुआ को सपा मुखिया अखिलेश यादव के हाथों को दो लाख 59 हजार 874 वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा। अखिलेश यादव को कुल छह लाख 21 हजार 578 वोट मिले जबकि निरहुआ को तीन लाख 61 हजार 704 वोट बटोर कर ही संतोष करना पड़ा था। दिनेश लाल यादव निरहुआ मूलतः गाजीपुर के सादात ब्लाक के टड़वां गांव का रहने वाले हैं। बीते लोकसभा चुनाव अभियान शुरू होने के साथ ही वह अचानक भाजपा की सदस्यता लिए और भाजपा उन्हें आजमगढ़ सीट पर सपा मुखिया अखिलेश यादव के खिलाफ अपना उम्मीदवार घोषित की। हालांकि उनके इस कदम से सपा समर्थकों खासकर यदुवंशियों में तीखी प्रतिक्रिया हुई। सोशल मीडिया के जरिये गालियां तक दी गईं। आजमगढ़ सीट पर वर्ष 2014 के चुनाव में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव जीते थे।

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