‘मेम साब’ का बिगड़ा जायका, ‘साहब’ का फुटपाथियों पर बरसा डंडा

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गाजीपुर। शहर में फुटपाथों पर अतिक्रमण कर दुकान लगाने वालों पर सोमवार को ऐसे ही डंडा नहीं बरसा। उसके पीछे की सामने आ रही कहानी कम रोचक नहीं है। कार्रवाई का मकसद अतिक्रमण से आमजन की होने वाली परेशानियों से निजात दिलाना नहीं, बल्कि अफसरानों की अपनी-अपनी खुन्नस रही। एक अफसर इस लिए खफा थे कि एक फुटपाथी दुकानदार ने उनकी मेम साब का जायका बिगाड़ कर रख दिया था तो दूसरा फुटपाथी एक अन्य साहब की बिल्कुल सुन नहीं रहा था। यह दुकानदार भी जायका बेचने वाला ही रहा।

इस कार्रवाई ने फुटपाथी दुकानदारों में हाहाकार मचा दिया। अपनों के बीच के दो की गुस्ताखी का खामियाजा सारे फुटपाथियों को जो भुगतना पड़ा। चर्चा है कि एक दिन एक अफसर की मेम साब निजी गाड़ी से शहर में निकलीं। कुछ चटपटा जायका लेने का उनका मन किया। सिंचाई विभाग चौराहे के पास गुमटी में फास्ट फूड बेचने वाले के पास उनकी गाड़ी रुकी। चालक गुमटी के सामने पहुंचा। मंचूरियन लिया। मैम साहब गाड़ी में बैठे ही मंचूरियन मुंह में डालीं, लेकिन उनका जायका बिगड़ गया। इसकी शिकायत करने जब उनका चालक गुमटी वाले दुकानदार से किया तो उल्टे वह मनबढ़ दुकानदार चालक पर बरस पड़ा और पूरी कीमत देकर उसे चलता होने को कहा। यह सुन-देख कर मेम साब का माथा गरम हो गया। बंगले पर लौट कर वह अपने साहब की चूड़ी कस दीं।

उसके बाद तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शहर कोतवाली से शुरू हुई। सरकारी दस्ता रास्ते में पड़े परसपुरा, मिश्रबाजार तिराहा, महुआबाग, कचहरी रोड, कलेक्ट्रेट, सिद्धेश्वर नगर के फुटपाथी अतिक्रमणकारियों को चेताते, हड़काते, हटवाते बढ़ता गया और टारगेट स्थल सिंचाई विभाग चौराहा पहुंच गया। उस गुमटी में रखे खान-पान के सारे सामान तहस-नहस कर दिए गए। इतने पर संतोष नहीं हुआ तो गुमटी उलाट दी गई। उसी क्रम में एक अन्य साहब ने भी महुआबाग चौराहा के पास एक चाट वाले से अपनी खुन्नस निकालने का मौका निकाल लिया। सरकारी दस्ते की अगुवाई कर रहे अधिकारी आगे बढ़ गए तो वह जेसीबी वापस बुलवाए और उस चाट वाले की दुकान के अगले हिस्से को एकदम से उजड़वा दिए। दुकान का मालिक और उसके अंदर बैठे ग्राहकों में कई यह समझाते रह गए कि दुकान का अगला हिस्सा अतिक्रमण के दायरे में नहीं है, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।

खैर अतिक्रण हटाने की इस कार्रवाई के पीछे की कहानी दुकानदारों और सरकारी हलके में भी खूब चर्चा बटोर रही है। इस कहानी को इस बात से और बल मिल रहा है कि शहर में पहली बार बगैर पूर्व चेतावनी यह कार्रवाई अचानक की गई। फिर खास दुकानों को नेस्तनाबूत करने की कोशिश की गई। एक व्यापारी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उस दिन की कार्रवाई में दुराग्रह साफ दिखा। अब तक यही होता आया है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले चेतावनी दी जाती रही है।

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