अदने लेखपाल के लिए अपनी प्रतिष्ठा फंसाईंं विधायक!

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गाजीपुर। एक ओर प्रदेश की योगी सरकार सरकारी कामकाज में बेजा सियासी दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करने का दम भरती है, वहीं सरकारी पार्टी के विधायक मामूली सरकारी कामों में भी टांग अड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

ऐसा ही एक मामला सदर तहसील के लेखपालों का है। पता चला है कि डीएम के बालाजी ने काहिल, बेपरवाह माने जाने वाले लेखपालों का तबादला गैर तहसीलों के लिए करने का फरमान जारी किया। उसके बाद उन लेखपालों ने अपनी सियासी पहुंच, असर का इस्तेमाल कर डीएम के उस आदेश को ठंडे बस्ते में डलवाने की कोशिश शुरू कर दी। करीब डेढ़ हफ्ते तक डीएम का वह आदेश जहां का तहां पड़ा रहा। तहसील मुख्यालय से उन लेखपालों को कार्यमुक्त करने की कार्यवाही शुरू नहीं हुई। बताया जाता है कि सरकारी पार्टी की विधायक ने एसडीएम ऑफिस में दबाव बना कर उस कार्यवाही को रोकवा दिया था।

बावजूद डीएम ने अब जबकि चांप चढ़ाई है तो उन लेखपालों को कार्यमुक्त करने की कार्यवाही शुरू हुई। इसकी भनक मिलते ही वह लेखपाल हरकत में आ गए। विधायक की ओर से एसडीएम ऑफिस को एक लेखपाल विशेष के लिए फोन गया कि उसे किसी भी दशा में कार्यमुक्त नहीं किया जाए। उस लेखपाल का तबादला कासिमाबाद के लिए हुआ है। चर्चा है कि डीएम के आदेश से पहले भी एसडीएम स्तर से उस लेखपाल का हलका बदलने की कोशिश हुई थी, लेकिन लेखपाल ने उस कार्यवाही को रोकवा दिया था।

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