मंत्री उपेंद्र तिवारी की शिक्षक भाभी को हाईकोर्ट की नोटिस

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गाजीपुर। पड़ोसी जिला बलिया के दो राजनेता प्रदेश सरकार के मौजूदा राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी और पूर्व कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी की राजनीतिक दुश्मनी जगजाहिर है, लेकिन अब लगता है यह पारिवारिक दुश्मनी का रूप लेने लगी है। उपेंद्र तिवारी की शिक्षक भाभीश्री मंजू तिवारी की बलिया के मझौली स्थित परमहंस इंटर कॉलेज में नियुक्ति और उनके वेतन भुगतान के मामले में कथित व्यापक गड़गड़ी को श्री चौधऱी के चचाजात भाई सतीश चौधरी नागा हाईकोर्ट तक घसीट ले गए हैं।

हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए इसमें आरोपितों को नोटिस जारी कर उनसे छह हफ्ते में जवाब तलब किया है। साथ ही अगली सुनवाई के लिए पांच सितंबर की तारीख मुकर्रर की है। आरोपितों में उपेंद्र तिवारी, मंजू तिवारी के अलावा प्रदेश सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, निदेशक माध्यमिक शिक्षा, डीआईओएस बलिया, विभागीय वित्त एवं लेखाधिकारी सहित परमहंस इंटर कॉलेज की प्रबंध कमेटी शामिल है। हलांकि हाईकोर्ट ने उपेंद्र तिवारी को जवाब के लिए नोटिस जारी नहीं किया है।

सतीश चौधरी नागा का आरोप है कि मंजू तिवारी को कूट रचित तरीके से सन् 1990 में परमहंश इंटर कॉलेज में बतौर शिक्षक नियुक्त किया गया। उसके बाद शुरू हुई नियुक्ति अवधि से उनके वेतन भुगतान कराने की कवायद। इसके लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया लेकिन बात नहीं बनी। कोर्ट ने उस आशय की याचिका खारिज कर दी। दी।

तब पुनर्विचार याचिका दाखिल हुई। उस पर विचारण के बाद कोर्ट ने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी मंडल स्तरीय कमेटी को सौंप दी। जांचोपरांत मंडलीय कमेटी ने मंजू तिवारी की नियुक्ति प्रक्रिया को अवैध करार दी। उसके बाद मंजू तिवारी हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच पहुंची। लखनऊ बेंच ने विभागीय अधिकारियों को आदेशित किया कि अगर मंजू तिवारी की नियुक्ति वैध है और वह सेवारत हैं तो उनका वेतन भुगतान किया जाए, लेकिन पूरे प्रकरण से अवगत विभागीय अधिकारियों ने कुछ नहीं किया। हालांकि तब तक उपेंद्र तिवारी विधायक बन चुके थे।

मंजू तिवारी ने वर्ष 2014 में अवमानना की याचिका दाखिल किया। वहां से जारी नोटिस पर तत्कालीन डीआईओएस बलिया ने जवाब दिया कि याचि मंजू तिवारी की नियुक्ति अवैध है। लिहाजा कोर्ट ने उनकी अवमानना याचिका खारिज कर दी गई। उसके बाद मंजू तिवारी की ओर से डीआईओएस बलिया के दफ्तर में अर्जी पड़ी। यह बात वर्ष 2016 की है। तत्कालीन डीआईओएस बलिया रमेश सिंह ने नियुक्ति से तब तक का वेतन का भुगतान करा दिया। बकौल सतीश चौधरी नागा, वह सब उपेंद्र तिवारी के सियासी रसूख के चलते हुआ।

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