जांबाज दारोगा दुर्गविजय सिंह पंचतत्व में विलीन

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गाजीपुर। बदमाशों संग मुठभेड़ में शहीद यूपी पुलिस के जांबाज दारोगा दुर्गविजय सिंह(48) बुधवार की दोपहर पूरे पुलिस सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका दाह संस्कार गाजीपुर श्मशानघाट पर हुआ। दुर्गविजय सिंह मूलतः मऊ जिले के रानीपुर क्षेत्र के रहने वाले थे और मीरजापुर जिले की पुलिस लाइन में तैनात थे। वह गाजीपुर भाजपा के युवा कार्यकर्ता पवन सिंह डिंपल के पिता थे। उनका परिवार गाजीपुर के वंशीबाजार में बने मकान में रहता है। दाहसंस्कार के वक्त श्मशानघाट पर गाजीपुर नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन विनोद अग्रवाल, भाजपा के जिला महामंत्री रामनरेश कुशवाहा व ओमप्रकाश राम, मंत्री प्रवीण सिंह, कोषाध्यक्ष अच्छेलाल गुप्त, नगर अध्यक्ष रासबिहारी राय, मीडिया प्रभारी शशिकांत शर्मा, लालजी गोंड, आईटी सेल के जिला संयोजक कार्तिक गुप्त, गर्वजीत सिंह, सुनील कुमार आदि ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर पुलिस कप्तान डॉ.अरविंद चतुर्वेदी सहित कई पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। पुलिस के जवानों ने अपने जाबांज दारोगा को अंतिम सलामी दी।

मालूम हो कि दारोगा दुर्ग विजय सिंह बीते दो जुलाई को हेड कांस्टेबल अखिलेश राय, आरक्षी सुनील, चालक खोभारी सिंह के साथ बज्रवाहन से मीरजापुर जिला कारागार में बंद बदमाश रोहित उर्फ साडू को मुजफ्फरनगर के एडीजे कोर्ट में एक मुकदमे की पेशी में ले गए थे। तीन जुलाई को वह रोहित की कोर्ट में पेशी कराकर मीरजापुर लौट रहे थे। रास्ते में पानीपथ खटीमा मार्ग पर स्थित सालारपुर बाजार के पास एक ढाबे पर मय रोहित अपनी टीम के साथ भोजन के लिए रुके थे। जैसे ही वह लोग रोहित को लेकर ढाबे से बाहर निकले तो पहले से घात लगाकर बैठे रोहित के साथियों ने दारोगा दुर्ग विजय सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मियों की आंखों में मिर्ची का पाउडर फेंक दिया। उससे उनकी आंखों में जलन होने लगी। मौका देख रोहित को लेकर उसके साथी भागने की कोशिश करने लगे। जब दारोगा दुर्गविजय सिंह ने उनका विरोध किया तब बदमाशों ने  उन पर फायर कर दिया। गोलियां पेट में लगने से दारोगा दुर्ग विजय जमीन पर गिरकर तड़पने लगे। उनकी टीम के अन्य सदस्यों को भी गोलियां लगीं। उसके बाद बदमाश रोहित को लेकर फरार हो गए थे। घायल दारोगा समेत अन्य पुलिस कर्मियों को मेरठ जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर देख दुर्गविजय सिंह को दिल्ली के एम्स के लिए रेफर कर दिया गया। जहां छह दिन बाद मंगलवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। उनका पार्थिव शरीर पहले उनके पैतृक गांव रानीपुर, मऊ ले जाया गया। उसके बाद गाजीपुर लाया गया।

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