सपाः चाचा ‘खड्गहस्त’, भतीजा ‘शरणागत’

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गाजीपुर। शायद सियासत ही ऐसा क्षेत्र है, जहां नेता, दल और मुद्दे को लेकर किसी परिवार में मतैक्य नहीं भी हो सकता है और न ऐसा दिख सकता है। अब समाजवादी पार्टी में मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र का ही मामला लें। पार्टी नेता राजेश राय पप्पू का मन-मिजाज हाल-फिलहाल पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह से नहीं बैठ रहा है। हालांकि श्री सिंह को लेकर राजेश राय पप्पू सार्वजनिक तौर पर कुछ कहने से परहेज करते हैं, लेकिन उनके करीब रहने वाले जानते हैं कि राजेश राय पप्पू के दिल में ओम प्रकाश सिंह के लिए वह जगह नहीं रह गई है, जो पहले कभी हुआ करती थी।

पार्टी के कार्यकर्ता भी इस बात को महसूस करते हैं। वह गौर करते हैं कि दोनों नेताओं की सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाली मुलाकातों में पहले वाली गर्मजोशी नहीं रहती। लोकसभा चुनाव से पहले की बात है। ओमप्रकाश सिंह की दिली इच्छा थी कि पार्टी उन्हें और जगह से भले न सही, कम से कम चंदौली सीट से जरूर लड़ा दे। टिकट के लिए वह लखनऊ में डेरा-डंडा डाल कर अपने पक्ष में लाइजनिंग करते, कराते रहे। संयोग से उसी वक्त राजेश राय पप्पू भी लखनऊ में प्रवास कर रहे थे, लेकिन वह ओमप्रकाश सिंह में दिलचस्पी लेने के बजाय बलिया संसदीय सीट को लेकर वहां के नेताओं की लॉवी में सक्रिय थे। उसके लिए उन्हें कहने का मौका भी था। मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र बलिया संसदीय सीट में जो आता है। उन दिनों की बात याद किया जाए तो तब पप्पू राय अपने पहले मकसद में कामयाब हो गए थे। वह बलिया संसदीय क्षेत्र की जिस लॉबी में सक्रिय थे, उसकी पहली कोशिश यही थी कि नीरज शेखऱ को फिर पार्टी का टिकट नहीं मिले। हुआ भी वही था।

पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने नीरज शेखऱ की जगह पूर्व विधायक सनातन पांडेय को टिकट थमा दिया था। वैसे बलिया संसदीय सीट के अगड़े वोटर खासकर राजपूतों ने सपा मुखिया अखिलेश यादव के उस फैसले को पलट दिया था। उनके उम्मीदवार सनातन पांडेय को हार का मुंह देखना पड़ा था, लेकिन शायद वह इत्तेफाक नहीं था कि सनातन पांडेय को मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में वोटों की खासी बढ़त मिली थी।

खैर, जहां राजेश राय पप्पू का पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह से पटरी नहीं बैठ रही है, वहीं करीब दो साल पहले सियासत में इंट्री मारने वाले उनके भतीजे हिमांशु राय को ओम प्रकाश सिंह के दरबार में हाजिरी लगाने में कोई हिचक नहीं है। कुछ ही दिन पहले हिमांशु राय ओमप्रकाश सिंह से मिलने उनके पैतृक गांव सेवराईं पहुंचे थे। इस मसले पर चर्चा में राय परिवार के एक करीबी की टिप्पणी थी कि संभवतः हिमांशु को पता है कि उनके चाचाश्री को सियासत के गुर सिखाने का काम ओम प्रकाश सिंह ने ही किया है। राजेश राय पप्पू सार्वजनिक रूप से ओमप्रकाश सिंह को अपना उस्ताद कबूलते भी हैं।