भाजपा सरकार के खिलाफ हुंकार भरे सपाई

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गाजीपुर। लोकसभा चुनाव के बाद सपाजनों के लिए शुक्रवार को यह पहला मौका था जब वह अपना दमखम सड़क पर दिखाए। अगस्त क्रांति दिवस पर वह भाजपा सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे थे और सरजू पांडेय पार्क में धरना दिए। हुंकार भरे। अंत में राज्यपाल को संबोधित 40 सूत्री ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपे।

इस मौके पर किसानों, नौजवानों, अल्पसंख्यकों, गरीबों, बेरोजगारों, छात्रों की समस्याओं के अलावा उन्नाव रेपकांड, सोनभद्र जनसंहार आदि मुद्दे उठाए गए। प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ खूब जुबानी वाण दागे गए। कहा गया कि भाजपा सरकार को जनहित की नहीं बल्कि अपने राजनैतिक एजेंडे की फिक्र है। इसे सपा के लोग कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। साथ ही ईवीएम, बिजली दर और यूपी बोर्ड की परीक्षा फीस में वृद्धि, सपा कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न, अल्पसंख्यकों पर फर्जी मुकदमे और फर्जी इनकाउंटर, पार्टी नेता आजम खान के खिलाफ कार्रवाई वगैरह के मुद्दे उठाकर भाजपा सरकार को घेरने की पूरी कोशिश हुई। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित यह धरना सुबह 11 बजे शुरू हुआ और शाम करीब पांच बजे तक चला।

एक तरह से पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह और विधायक डॉ.वीरेंद्र यादव पार्टी के इस शक्ति प्रदर्शन में हीरो के रूप में दिखे। जहां श्री सिंह अपने पुराने अंदाज में गंगा पार मेदनीपुर तिराहे से सैकड़ों बाइकों पर सवार कार्यकर्ताओं संग धऱना स्थल पर पहुंचे। वह खुद बुलेट पर सवार थे। बुलेट वरिष्ठ नेता डॉ.सानंद सिंह चला रहे थे, वहीं डॉ. वीरेंद्र यादव भी बाइक जुलूस के साथ धऱना में पहुंचे थे। उनका जुलूस लंका मैदान से निकला था। वह भी बुलेट पर सवार थे। उनके सारथी थे विवेक कुमार सिंह शम्मी।

धरना में कार्यकर्ताओं की बढ़चढ़ कर हिस्सेदारी पर युवा नेता डॉ.समीर सिंह ने कहा कि इससे साबित हो गया कि प्रदेश सरकार के खिलाफ जनमानस में बेहद गुस्सा है और सपा के लोग इस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कमर कस चुके हैं। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से इस धरना की खास तैयारी नहीं थी। बावजूद कार्यकर्ता स्वतः धरना में पहुंचे थे। पार्टी के सभी फ्रंटल संगठनों के भी लोग थे। धरना में जिलाध्यक्ष डॉ.नन्हकू यादव, पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह, रामधारी यादव, हैदर अली टाईगर, पूर्व एमएलसी विजय यादव, जिला पंचायत चेयरमैन प्रतिनिधि विजय यादव, जिला पंचायत सदस्य सत्या यादव, मीडिया प्रभारी अरुण श्रीवास्तव, किशुनदेव यादव आदि प्रमुख थे। संचालन अशोक बिंद ने किया।

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