…और सपा के राष्ट्रीय सचिव राजीव राय ने अपनी पार्टी के मुखिया से मांगी सरेआम माफी

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गाजीपुर। प्रदेश की सत्ता से हटने के बाद से न जाने कितने छोटे-बड़े नेता सपा छोड़ कर दूसरी पार्टियों में जाकर फिर से सांसद, विधायक बन चुके हैं। बावजूद याद करें तो सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उनके बाबत कोई खास टिप्पणी न सुनने में आई और न पढ़ने को ही मिली, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर का पार्टी छोड़ना अखिलेश यादव को आहत करने वाला है। संभवतः यही वजह है कि राज्यसभा की यूपी सीट के लिए उपचुनाव में नीरज शेखर ने मंगलवार को विधान भवन लखनऊ में बहैसियत भाजपा उम्मीदवार नामांकन किया। उसके बाद अपने ट्विटर एकाउंट पर उस नामांकन की फोटो अपलोड करते हुए अखिलेश यादव ने एकदम तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा-लोभ की सियासत में विचारधारा की तिलांजलि देकर सत्ता से बंगला, गाड़ी, गनर बना रहे। सिद्धांत नहीं आपके लिए स्वार्थ सर्वोपरि है।

अखिलेश यादव के उस ट्विट पर कुछ ही देर बाद सपा के राष्ट्रीय सचिव व प्रवक्ता राजीव राय ने अपने ट्विटर एकाउंट पर रिप्लाई देते हुए लिखा-मैं सार्वजनिक रूप से माफी मांग रहा हूं। मैं ही अपराधी हूं। इनको(नीरज शेखर)चंद्रशेखरजी के बाद पार्टी में लाने और चुनाव लड़वाने के लिए। बकौल राजीव राय, नीरज शेखर खुद इस बात को मंच से कबूल चुके हैं। राजीव राय ने इसी ट्विट में यह भी बताया है कि चंद्रशेखर ने जीते जी अपने इस छोटे बेटे नीरज शेखर को किसी लायक नहीं समझा था। राजीव राय इतने पर ही नहीं रुकते हैं। वह दूसरा ट्विट करते हुए कहते हैं-आज चंद्रशेखरजी की आत्मा रो रही होगी। वह प्रधानमंत्री पद को लात मार दिए थे, लेकिन आजीवन भाजपा और अपने वसूलों से समझौता नहीं किए।

उधर अखिलेश यादव और राजीव राय की इस टिप्पणी की चर्चा पर नीरज शेखर के समर्थकों का कहना है कि जहां तक अखिलेश यादव की बात है तो वह खुद से दूर होती जा रही सत्ता से बौखलाहट में हैं और राजीव राय जैसे हवा-हवाई नेताओं की बात करना बेमानी होगी। हकीकत यही है कि जमीन पर राजीव राय का कुछ नहीं हैं। पहले वह मऊ में जमीन तलाशने की कोशिश किए और वहां मुंहकी खाने के बाद बलिया में गुंजाइश तलाशने लगे। यह भी तय है कि उनका ख्वाब कभी पूरा नहीं होगा।

मालूम हो कि राजीव राय पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं और मूलतः बलिया जिला के रहने वाले हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा के टिकट पर घोसी(मऊ) सीट से लड़े थे, लेकिन भाजपा लहर में वह काफी वोटों के अंतर से हार गए थे। इस बार के लोकसभा चुनाव में बलिया सीट पर पार्टी टिकट के लिए अपनी दावेदारी किए थे। वह सपा में नीरज शेखर के विरोधी खेमे में खड़े थे। हालांकि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने विरोधी खेमे की बात रखते हुए नीरज शेखर का टिकट काट दिया था, लेकिन राजीव राय की उस दावेदारी की अनदेखी करते हुए अपनी पार्टी के ही पूर्व विधायक सनातन पांडेय को टिकट दिया था। उसके बाद से नीरज शेखर अखिलेश यादव से नाखुश थे। वह और उनके लोग बलिया में सनातन पांडेय के चुनाव अभियान से खुद को दूर कर लिए। उसका लाभ भाजपा को मिला और पहली बार वह बलिया संसदीय सीट अपने नाम दर्ज कराने में सफल हुई थी। इधर नीरज शेखर राज्यसभा और सपा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। अब भाजपा राज्यसभा की नीरज शेखर की छोड़ी सीट पर हो रहे उप चुनाव में उन्हीं को उतारी है। नीरज शेखर के इस कदम पर सपा मुखिया ही नहीं बल्कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता भी बेहद खफा हैं। प्रायः हर रोज यह कार्यकर्ता सोशल मीडिया के जरिये उन्हें भरहिक कोस रहे हैं।

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