सीओ जमानियां की ‘वफादारी’, भाजपा की ‘तरफदारी’

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गाजीपुर। ‘…जिसके लिए बदनाम हुए\ आज वही हमसे बेगाने/ बेगाने रहते हैं…’। जनाब हबीब जालिब की यह पंक्तियां गौर फरमाएं तो निवर्तमान सीओ जमानियां कुल भूषण ओझा पर सटीक बैठती हैं। बीते लोकसभा चुनाव अभियान में सरकारी पार्टी भाजपा के लिए वह पूरी तरह बदनाम हो गए। यहां तक कि विरोधी पार्टी से जुड़े ग्राम प्रधानों को फोन पर हड़काते उनका ऑडियो तक सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। हालांकि तब उसकी हकीकत की पुष्टि आधिकारिक रूप से नहीं हुई थी, लेकिन श्री ओझा की आवाज से वाकिफ लोगों और उस ऑडियो में बातचीत के संदर्भ को लेकर विरोधी पार्टी के लोगों का दावा था कि वायरल ऑडियो में आवाज श्री ओझा के सिवाय किसी की नहीं है। बल्कि बसपा-सपा गठबंधन ने उस वायरल ऑडियो को अपने अभियान में एक बड़ा मुद्दा बनाया था।

कुल भूषण ओझा की इस वफादारी के बदले भाजपा उनको क्या दी।  यह सवाल खुद भाजपा में ही उठ रहा है। वह लोकसभा चुनाव की घोषणा से कुछ ही दिन पहले जमानियां में तैनात हुए थे। वह मान रहे थे कि कुछ माह बाद अपने रिटायरमेंट तक वह जमानियां सर्किल में ही बने रहेंगे, लेकिन उमकी यह इच्छा धरी की धरी रह गई। उनका तबादला महत्वहीन पद माने जाने वाले पीएसी के डिप्टी कमांडेंट के लिए बाराबंकी कर दिया गया।

हालांकि न कुल भूषण ओझा को अभी कार्यमुक्त किया गया है न उनकी जगह पर शासन स्तर से अभी किसी पीपीएस अफसर की तैनाती ही हुई है। वैसे महकमे की आफिशियल वेबसाइट खंगालने पर वह अपडेट दिख रही है। जमानियां सीओ के नाम के आगे कुलभूषण ओझा की जगह ओजस्वी चावला का नाम अंकित कर दिया गया है। भाजपा के गलियारे से मिली खबर के मुताबिक कुलभूषण ओझा को हटवाने में पार्टी के ही लोगों का हाथ और दिमाग चला है। दरअसल कुलभूषण ओझा के रहते जमनियां इलाके में उन लोगों की अपनी वाली चल नहीं रही है। बावजूद भाजपा का एक खेमा श्री ओझा को सीओ जमानियां के रूप में देखना चाहता है, लेकिन हाल-फिलहाल उन्हें हटवाने वाला खेमा ही भारी दिख रहा है।

खैर पुलिस महकमे में जमानियां सर्किल सरकारी पार्टी के लिए काम करने की बात कोई पहली बार सामने नहीं आई है। सपा के राज में तत्कालीन एसआई प्रवीण यादव को वहां के लोग आज भी भूले नहीं हैं। उस वक्त यही भाजपा के लोग प्रवीण यादव पर तत्कालीन सरकारी पार्टी सपा के लिए काम करने का आरोप लगाते थे। एक-दो मौके ऐसे भी आए कि प्रवीण यादव के हाथों भाजपा के कई सीनियर नेता न सिर्फ लठियाए गए, बल्कि जेल भी काटे। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने जमानियां सर्किल के एसओ सुहवल के पद से हटा दिया था, लेकिन चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही प्रवीण यादव दोबारा एसओ सुहवल की कुर्सी संभाल लिए थे। जाहिर है कि वह उनकी राजनीतिक पहुंच, प्रभाव का नतीजा था। देखा जाए तो प्रवीण यादव का भाजपा राज में भी सब कुछ ठीक ही चल रहा है। वह तरक्की पाकर इंस्पेक्टर हो गए हैं और संभवतः इन दिनों सहारनपुर जिले की कोई अहम कोतवाली संभाल रहे हैं। उसके पहले वह वाराणसी के कई थानों का प्रभार संभाले थे।

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