अफजाल अंसारी से नजदीकियां बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ते सपाई

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गाजीपुर।…मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी/ किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी। जनाब बशीर बद्र के शेर की यह पंक्तियां सांसद अफजाल अंसारी  ने उस वक्त दोहराई थी, जब भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में करीब 35 माह की जेल काट कर वह साल 2009 में जमानत पर बाहर आए थे। जेल जाने तक वह सपा के सांसद थे, लेकिन उस कठिन हालत में सपा से अपेक्षात्मक सहयोग नहीं मिलने का उनके दिल में कसक थी। जेल से निकलने के बाद उन्होंने लंका मैदान में अपने समर्थकों की सभा की थी।

उसी सभा में अफजाल ने बशीर बद्र साहब की वह पंक्तियां सुनाई थी। जाहिर है कि वह पंक्तियां सपा के नेताओं के लिए थीं। उसके बाद वह भाइयों समेत बसपा में चले गए थे और बसपा के ही टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े थे। तब सपा से सीधे मुकाबले में वह हार गए थे। उसके बाद अफजाल संग सियासी राह भटकाव वाली रही। बसपा से निकाले गए। अपना खुद का दल बनाए। फिर सपा में अपने दल का विलय किए, लेकिन सपा के घरेलू झगड़े के शिकार बने। आखिर बसपा में उनकी ससम्मान वापसी हुई, और आज वह बसपा के सांसद हैं। यह भी साफ है कि दोबारा उनके सांसद बनने में सपा का गठबंधन अहम कारण रहा है, लेकिन अब सपा-बसपा गठबंधन टूट चुका है।

बावजूद सपा के गाजीपुर के नेताओं में अफजाल के लिए वही जज्बा कायम है। बीते 14 अगस्त को अफजाल का जन्म दिन था। उनके निमंत्रण पर सपा नेता भी इस फक्र के साथ पहुंचे थे कि अफजाल भाई ने उनको खास तौर पर बुलाया है। इसको लेकर उनमें भरपूर उल्लास, उत्साह था। सपा के उन नेताओं में पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह, विधायक डॉ.वीरेंद्र यादव, जिलाध्यक्ष डॉ.नन्हकू यादव आदि प्रमुख थे। जाहिर है उस मौके पर सपा के हर नेता ने अफजाल की तारीफ की और उनके दीर्घायु जीवन की कामना की। सपा की गतिविधियों पर नजर रखने वालों का कहना है कि पार्टी नेताओं के लिए चुनावी सियासत में अफजाल जरूरत हैं। यही वजह है कि अफजाल के नजदीक रहने का वह कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते हैं।

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