पत्नी के जरिये बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह की भाजपा के और करीब जाने की कोशिश!

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बाराचवर(यशवंत सिंह)। बाहुबली नेता और जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह भाजपा के और करीब जाने की कोशिश में हैं। इस चर्चा को और बल तब मिला है जब उनकी पत्नी श्रीकला रेड्डी चार दिन पहले भाजपा में विधिवत शामिल हुई हैं। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई। वैसे तो धनंजय सिंह इस वक्त निषाद पार्टी में हैं और निषाद पार्टी भाजपा की अगुवाई वाले राजग का एक घटक है। धंनंजय सिंह को मालूम है कि उनकी दागी छवि के चलते उन्हें भाजपा नेतृत्व पार्टी में लेने से परहेज करेगा. लिहाजा बीते लोकसभा चुनाव में उनकी दिली इच्छा थी कि भाजपा खुद टिकट भले न दे लेकिन राजग कोटे से उनके लिए जौनपुर सीट छोड़ दे। तब यह भी चर्चा थी कि उस वक्त राजग का ही हिस्सा रहे सुभासपा से भी उनकी बात हुई थी। शायद वही वजह थी कि सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भाजपा से सीट बंटवारे की वार्ता में जौनपुर संसदीय सीट भी अपनी पार्टी के खाते में मांग रहे थे। हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर ही ओमप्रकाश राजभर ने ऐन चुनाव अभियान के दौरान ही भाजपा से अपना गठबंधन तोड़ लिया था, लेकिन धनंजय सिंह भाजपा के प्रचार अभियान में जुटे रहे। उसी क्रम में वह गाजीपुर संसदीय क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के समर्थन में धनंजय सिंह प्रचार करने आए भी थे।

धनंजय सिंह का गाजीपुर से काफी गहरा जुड़ाव है। एक तो उनकी बहन गाजीपुर के कासिमाबाद क्षेत्र के मिर्जापुर गांव में ब्याही हैं। उनके बहनोई अरुण सिंह सेना में कर्नल हैं। इसके अलावा गाजीपुर के और भी कई लोग हैं, जिनसे धनंजय सिंह के अच्छे तालुक्कात हैं। फिर उनके धुर विरोधी फैजाबाद के पूर्व विधायक अभय सिंह भी बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बेहद करीब हैं। शायद यही वजह है कि धनंजय सिंह की हर गतिविधि पर गाजीपुर के लोग खासी दिलचस्पी लेते हैं।

बाहुबली धनंजय सिंह के सियासी सफर पर नजर डाली जाए तो पहली बार साल 2002 में वह जौनपुर की रारी विधानसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उसके बाद उन्होंने साल 2007 में जदयू का दामन थामा और दूसरी बार विधानसभा में पहुंचे। फिर साल 2008 में वह बसपा में चले गए और उसके टिकट पर साल 2009 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर सीट से लड़े। सांसद बने। हालांकि उसके बाद धनंजय सिंह के सियासी सितारे गर्दिश में चले गए। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में उनकी दूसरी पत्नी डॉ.जागृति सिंह चुनाव लड़ीं और हार गईं। उसी बीच धनंजय सिंह बसपा से निकाले गए। वह साल 2014 के लोकसभा चुनाव अपनी जौनपुर सीट पर निर्दल लड़े लेकिन मोदी लहर में हार गए। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में वह निषाद पार्टी के टिकट पर खुद उतरे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।

तीसरी पत्नी हैं श्रीकला रेड्डी

धनंजय सिंह की पहली पत्नी मीनाक्षी सिंह मीनू बिहार से जुड़ी थीं। साल 2007 में लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आवास पर उनकी संदिग्ध स्थितियों में मौत हो गई थी। उसके बाद धनंजय सिंह दंत चिकित्सक और गोरखपुर की रहने वाली जागृति सिंह के साथ मेहर स्थित शारदा देवी मंदिर में परिणय सूत्र में बंध गए थे, लेकिन घर की नौकरानी राखी की हत्या के मामले में पति-पत्नी को जेल जाना पड़ा था। उसको लेकर उनके रिश्ते टूट गए। फिर साल 2017 में धनंजय सिंह ने दक्षिण भारतीय श्रीकला रेड्डी से शादी रचाई। वह तेलांगना की रहने वाली हैं और धनाढ्य परिवार से हैं। उनका परिवार निप्पो बैट्री बनाने वाली फैक्ट्री का मालिक है। उनके पिता पूर्व विधायक हैं। अब देखना है कि धनंजय सिंह की यह तीसरी हमसफर उनके सियासी सफर में कहां तक कारगर साबित होती हैं।

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