पुलिस की दोहरी नीति, हत्यारोपी पर नरम, गवाह पर गरम

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गाजीपुर। योगी सरकार लाख कहे और जतन कर ले, लेकिन उसकी पुलिस की मनमानी में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। कम से कम गाजीपुर की कासिमाबाद पुलिस की तो यही स्थिति है। हत्या के एक मामले में कोर्ट में उसकी लचर पैरवी के चलते मुख्य आरोपित जमानत पर जेल से बाहर आ गया और अब घटना के वयोवृद्ध और पूर्व शिक्षक गवाह के साथ वह इस तरह पेश आ रही है, जैसे कि वही हत्यारोपित हों। कासिमाबाद पुलिस की इस कारस्तानी ने राज्य कर्मियों को आक्रोशित कर दिया है।

इस मामले को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को पुलिस कप्तान से मिला। बताया कि पिछले साल हुई हत्या के मामले में बेसिक शिक्षा परिषद एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बृजेश यादव के पिता रिटायर शिक्षक 70 वर्षीय हरिराम सिंह यादव गवाह हैं। मामले की विवेचना के नाम पर विवेचक बलवान सिंह उन्हें बीते बुधवार की दोपहर एक बजे घर से उठा कर कासिमाबाद थाने में ले गए। फिर उनके साथ अमर्यादित एवं अपशब्दों का प्रयोग करने लगे। यही नहीं उनको रात करीब दस बजे कासिमाबाद चौराहे पर छोड़ दिए। साथ ही विवेचक ने यह धमकी भी दी कि अगर अगले दिन सुबह वह खुद थाने में नहीं आएंगे और अगर पुलिस के हिसाब से गवाही नहीं देंगे तो उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कप्तान से विवेचक के इस रवैये पर आक्रोश जताते हुए विवेचक को बदलने की मांग की। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि गवाह की अवस्था को देखते हुए उनसे दिन के पहर और जिला मुख्यालय पर घटना के बाबत बयान लिए जाएं। प्रतिनिधिमंडल में शामिल विवेक कुमार सिंह शम्मी ने बताया कि पुलिस कप्तान ने शिकायत को गंभीरता से लिया और भरोसा दिया कि वास्तव में विवेचक गवाह के साथ ऐसा किया होगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। भविष्य में उस गवाह के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होगा। प्रतिनिधिमंडल में संगठन के जिलाध्यक्ष दुर्गेश श्रीवास्तव, अरविंद नाथ राय, अरविंद कुमार सिंह, निर्भय नारायण सिंह, हनुमान, बालेंद्र त्रिपाठी, श्रीकांत राय, रामअवतार, बृजेश, विजयशंकर राय, अरविंद कुशवाहा, शाहिद परवेज आदि थे।

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