…तब फोरलेन की परियोजनाओं पर लग जाएगा ‘ग्रहण’!

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गाजीपुर। नेशनल हाईवे आथॉरिटी ऑफ इंडिया(एनएचएआई) की गाजीपुर में प्रस्तावित फोन लेन की परियोजनाएं हाल-फिलहाल लटक सकती हैं। इस आशंका के पीछे एनएचएआई की तंगहाली है। एनएचएआई कर्ज में डूब गई है। इस दशा में उसके लिए नई सड़कों का निर्माण शुरू करना मुश्किल हो गया है।

‘जनसत्ता ऑनलाइन’ की खबर के मुताबिक केंद्र सरकार ने एमएचएआई को कहा है कि नई सड़कों के निर्माण कार्य रोक दिए जाएं। प्रधानमंत्री कार्यालय(पीएमओ) ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को इस आशय की चिट्ठी भेजी है। हालांकि गाजीपुर आजकल डॉट कॉम ने एनएचएआई के अधिकारियों से चर्चा की लेकिन किसी ने इस पर कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि वाराणसी-गोरखपुर मार्ग पर फोर लेन का निर्माण चल ही रहा है। इसमें कोई रुकावट नहीं है। एक सवाल पर एनएचएआई के एक अधिकारी ने कहा कि गाजीपुर-सैय्यदराजा मार्ग के फोरलेन का डीपीआर अभी मंजूर ही नहीं है तो उसके निर्माण के आरंभ होने या न होने की चर्चा ही बेमतलब है। गाजीपुर-माझीघाट(बलिया) मार्ग के फोरलेन निर्माण के सवाल पर भी उस अधिकारी ने कुछ भी कहने में असमर्थता जताई। एनएचएआई के कर्ज में डूबने की खबर के बाबत उस अधिकारी ने यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि यह ऊपर का मामला है।

खबर के मुताबिक पांच साल में एनएचएआई का कर्ज 40 हजार करोड़ से बढ़कर एक लाख 78 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। दरअसल एनएचएआई का आउटपुट दो गुना हो गया है। जहां एमएचएआई की सड़क निर्माण की रफ्तार साल 2014 में प्रतिदिन 12 किलोमीटर की थी, वहीं अब प्रतिदिन 27 किलोमीटर सड़क बन रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पीएमओ की चिट्ठी में कहा गया है कि सड़कों के अनियोजित और अत्यधिक विस्तार से एनएचएआई के लिए यह हालात बने हैं। खबर में तो यहां तक बताया गया है कि पीएमओ ने चिट्ठी में साफ कहा है कि एनएचएआई अपनी सड़क परियोजनाओं को रोक दे।

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