गंगा में बढ़ाव जारी, प्रशासन अलर्ट, लगाई गई एनडीआरएफ की टीएम

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गाजीपुर। गंगा का उफान अभी थमा नहीं है। उधर गंगा के दबाव में गोमती सहित अन्य छोटी नदियां भी बढ़ रही हैं। प्रशासन अलर्ट है। अधिकारी प्रभावित इलाकों के दौरे कर हालात का जायजा ले रहे हैं। एनडीआरएफ की टीम बुला ली गई है। प्रभावित इलाकों में जरूरत के हिसाब से नावों की व्यवस्था कर दी गई है। बाढ़ से घिरे डेरों के लोगों को हटा दिया गया है। जिला मुख्यालय पर केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज पर मंगलवार की शाम पांच बजे जलस्तर 63.920 मीटर दर्ज किया गया, जबकि जलस्तर बढ़ने की रफ्तार प्रतिघंटा एक सेंटीमीटर थी।

सिंचाई विभाग(बाढ़) के एक्सईएन राजेश शर्मा ने बताया कि ऊपर प्रयागराज में भी गंगा-यमुना के बढ़ने की सूचना मिल रही है। वहां गंगा के बढ़ने की रफ्तार प्रतिघंटा दो सेंटीमीटर है। इस दशा में नहीं लगता कि गाजीपुर में अगले दो-तीन दिन में गंगा का बढ़ाव थमेगा। दरअसल, सोमवार को राजस्थान के धौलपुर बैराज से 18.93 लाख 567 क्यूसेक और कोटा बैराज से 6.66 लाख 758 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया है। उसका दबाव गंगा में बनेगा।

डीएम के बाला जी और एसपी डॉ.अरविंद चतुर्वेदी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। पीड़ित ग्रामीणों से मिले। उनकी समस्याएं सुने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिए। एडीएम राजेश कुमार ने बताया कि बाढ़ का सर्वाधिक असर सेवराईं तहसील क्षेत्र में है। उसके अलावा जमानियां, मुहम्मदाबाद, सदर और सैदपुर में भी गंगा का बाढ़ तटवर्ती गांवों में प्रवेश कर गया है। सैदपुर इलाके के कई गांव गोमती की बाढ़ से प्रभावित हैं। गोमती में गंगा का दबाव है। एनडीआरएफ की टीम बुला ली गई है। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में परिषदीय स्कूलों का संचालन सामान्य दिनों की तरह हो रहा है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में खेतों में खड़ी फसल भी पानी में डूब गई है। पशुओं के चारे का संकट हो गया है। कई जगह संपर्क मार्गों के ऊपर से पानी बह रहा है। इसी बीच खबर मिली है कि नंदगंज-करंडा मार्ग पर मानिकपुर कोटे में गांगी नदी का एप्रोच बाढ़ के पानी के दबाव से तड़के बैठ गया। उसके चलते वाहनों का आवागमन बंद हो गया।

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