गंगाः फिलहाल राहत नहीं, प्रभारी मंत्री ने किया दौरा

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गाजीपुर। गंगा फिलहाल राहत देने के मूड में नहीं लग रहीं। बढ़ाव जारी है। गाजीपुर में बुधवार को दोपहर में कुछ देर के लिए ठहराव आया, लेकिन फिर बढ़ने का क्रम शुरू हो गया। जिला मुख्यालय पर जलस्तर 64,080 मीटर रिकार्ड हुआ। दो दिन के दौरे पर आए प्रभारी मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने अंतिम दिन बुधवार को बाढ़ प्रभावित रेवतीपुर ब्लाक का जायजा लिया। पीड़ित ग्रामीणों से वह सीधे मिले। उनकी समस्याएं सुने। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

सिंचाई विभाग (बाढ़) के एक्सईएन राजेश शर्मा ने बताया कि संकेत यही है कि अगले पांच दिनों तक गंगा का बढ़ाव नहीं थमेगा। जहां ऊपर प्रयागराज में गंगा डेढ़ सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ रही हैं, वहीं नीचे घाघरा का बढ़ाव भी गंगा के स्वभाविक प्रवाह को रोक रहा है। हालांकि घाघरा में मामूली घटाव दर्ज हुआ है। इं.शर्मा ने बताया कि ऊपर गंगा में बढ़ाव की वजह यमुना हैं और यमुना में चंबल नगी का दबाव है। राजस्थान में भारी बारिश के कारण धौलपुर और कोटा बैराज से करीब २६ लाख क्यूसेक पानी चंबल में छोड़ा गया है।

गंगा में बाढ़ के चलते गाजीपुर में गोमती सहित अन्य सहयोगी नदियां भी उफन रही हैं। सभी नदियों को मिलाकर करीब 1200 गांव बाढ़ में घिर गए हैं। प्रशासन अलर्ट है। एनडीआरएफ की टीम लग गई है। सेवराईं तहसील के कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है। डीएम के बालाजी खुद न सिर्फ हालात पर नजर रख रहे हैं, बल्कि वह दौरा भी कर रहे हैं। एसपी डॉ. अरविंद्र चदुर्वेदी संग वह तहसील मुहम्मदाबाद के
बाढ़ग्रस्त गांव फिरोजपुर, धरमापुर एवं सेमरा गांव में नाव के जरिये पहुंचे। ग्रामीणों की समस्याएं सुने। हर मदद का  भरोसा दिए। इसी क्रम में उन्होंने एसडीएम मुहम्मदाबाद को आदेशित किया कि बाढ़ पीड़ित गांवों में तैनात लेखपालों को सेफ्टी जैकेट उपलब्ध कराएं, गांव के प्रत्येक प्वाइंट पर दो नाव उपलब्ध कराएं। बाढ़ में फंसे मवेशी एवं ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए। डीएम सदर तहसील के गंगा दास बाबा क्षेत्र में भी बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण किए।
उधर बीएसए श्रवण कुमार ने बताया कि बाढ़ को देखते हुए डीएम के बालाजी के आदेश पर कक्षा एक से आठ तक के स्कूल 19 सितंबर से दो दिन के लिए बंद रहेंगे। यह आदेश सरकारी सहित निजी स्कूलों पर भी प्रभावी रहेगा। मालूम हो कि बाढ़ के पानी में कई स्कूल घिर गए हैं अथवा उनके रास्ते डूब गए हैं।

 

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