भाजपा की गोष्ठी में डॉ.मांधाता राय ने पार्टी नेताओं की ही पीट दी भद

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गाजीपुर। भाजपा की प्रबुद्ध वर्ग की गोष्ठी में तब अजीबो गरीब हालात बन गए जब मुख्य वक्ता ने ही पार्टी नेताओं की भद पीट दी। पार्टी के राष्ट्रीय एकता अभियान के एक राष्ट्र-एक संविधान के तहत रविवार को बंशीबाजार स्थित एक मैरेज हॉल में यह गोष्ठी आयोजित थी। गोष्ठी का एजेंडा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के मोदी सरकार का फैसला था। दरअसल पार्टी इसके जरिये अपनी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले पर प्रबुद्ध वर्ग की वाहवाही बटोरना चाहती है। शायद यही वजह है कि ऐसी गोष्ठियां हर जिले में आयोजित की जा रही हैंं।

गाजीपुर में भी इस बहुप्रचारित गोष्ठी में जिले भर के प्रबुद्धजनों में बकायदा निमंत्रण कार्ड बांटे गए थे। तय कार्यक्रम के मुताबिक गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली के सांसद परवेश वर्मा को आना था, लेकिन किन्हीं कारणों से वह नहीं आए। तब पार्टी के काशी प्रांत नेतृत्व ने भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र सिंह पटेल को रवाना किया, लेकिन उनके पहुंचने में विलंब देख आयोजकों ने आमंत्रितजनों में शामिल वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व प्राचार्य डॉ.मांधाता राय को मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर साग्रह आने को कहा। अचानक अपना नाम सुन डॉ. मांधाता राय अचकचाए। फिर अनमने ढंग से मंच पर पहुंच कर अपना स्थान ग्रहण कर लिए। फिर कुछ ही देर में देवेंद्र सिंह पटेल भी आ गए। आयोजकों ने मुख्य अतिथि के रूप में उनका स्वागत किया और मुख्य वक्ता के रूप में डॉ.मांधाता राय को बोलने के लिए आमंत्रित किया।

डॉ.मांधाता राय ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही कहा कि अव्वल तो वह खुद मुख्य वक्ता के रूप में मोदी सरकार के इस फैसले पर बोलने की तैयारी करके नहीं आए हैं। आमंत्रित करते वक्त बस यही बताया गया था कि उन्हें गोष्ठी की अध्यक्षता भर करनी है। सो वह गोष्ठी में दूसरों को सुनने आए हैं। बल्कि इसके लिए वह नवरात्रि के पहले दिन का पूजा-पाठ छोड़ कर आए हैं। फिर डॉ.राय आगे बोले-जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद ३७० और ३५ ए हटाने का फैसला निश्चित रूप से सही है, लेकिन इस पर चर्चा गाजीपुर में करना अप्रासंगिक है। भाजपा को चाहिए कि जम्मू-कश्मीर से इतर जगह विस्फोटक होती जा रही जनसंख्या और बढ़ते भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा कराए। यह दोनों भारत के लिए अहम मुद्दे हैं। इतना कहने के बाद डॉ.मांधाता राय मंच से उतरे और नीचे लगी कुर्सियों में एक पर आकर बैठ गए।

जाहिर है कि डॉ. मांधाता राय का वह कथन आयोजकों समेत भाजपा नेताओं के लिए अनपेक्षित था। सभी असहज हो गए थे, लेकिन आमंत्रितजनों में कई प्रबुद्ध डॉ. मांधाता राय के उस कथन से सहमत दिखे। तब मंच पर माइक पकड़े पार्टी के काशी प्रांत के उपाध्यक्ष कृष्णबिहारी राय। कहे कि पार्टी जनसंख्या को भी मुद्दा बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में इस मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा किए थे। उन्होंने कहा कि हम जनजागरण के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहते है कि उपरोक्त धाराओं से जम्मू कश्मीर सहित देश की जनता ने भारी दुष्परिणाम झेला है।और देश की जनता यह जानती है कि इसे हटाना भी आसान नहीं था परन्तु भारत के जनमानष के इच्छा अनुरूप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढनिष्ठा  शक्ति के बल यह संभव हो सका है।

पार्टी के प्रदेश मंत्री रामतेज पांडेय ने कहा कि  देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य रहा है कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों का सेकुलरवाद जो तुष्टिकरण की राजनीति को लगातार बढावा देती रही। धारा 370 तथा 35 ए के हटने से जम्मू-कश्मीर की जनता को वास्तविक रुप से आजादी मिली है। तुष्टिकरण की राजनीति कर भाजपा के राष्ट्रवादी विचारों का विरोध करने वालों के मुंह पर करारा तमाचा है। पूर्व जिलाध्यक्ष विजय शंकर राय ने कहा कि 370 व 35ए के हटने की परिचर्चा आज देश ही नहीं विदेशों मे हो रही है कश्मीर के लिए हजारों हजार भारतीय युवाओं ने अपने जान कि कुर्बानी दी है।भाजपा सरकार व प्रधानमंत्री के प्रति सारा देश कृतज्ञ हैं। जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने कहा कि देश के लिए कलंक 370 तथा 35 ए के समाप्ति से देश को मुख्य धारा मे जोडऩे का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह ने किया है यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

गोष्ठी में रामहित राम, प्रभुनाथ चौहान, सरोज कुशवाहा, जितेंद्र नाथ पांडेय आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत पं. दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ वंदेमातरम से हुआ।

इस अवसर पर सुनील सिंह,  राजेश भारद्वाज,रामनरेश कुशवाहा,योगेश सिंह,विनोद अग्रवाल, सुमित तिवारी, शशिकांत शर्मा, अच्छे लाल गुप्त, अनिल पांडेय, मुकेश राय, ओमकार सिंह, निमेष पांडेय, साक्षी श्रीवास्तव, सुरेश बिंद, माया सिंह, रेशमी शर्मा आदि भी उपस्थित थे। संचालन पार्टी उपाध्यक्ष और कार्यक्रम संयोजक अनिल यादव ने किया।

…और कार्यकर्ताओं को यह खटका

गोष्ठी में भाजपा नेताओं को जहां डॉ. मांधाता राय की बात खटकी वहीं मौजूद कार्यकर्ताओं को चुनींदे लोगों को ही बोलने का मौका देना खटका। एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने अपनी पहचान न देने के आग्रह के साथ कहा कि स्थिति यह है कि कोई भी कार्यक्रम हो वही चुनींदे लोगों को बोलने का मौका दिया जाता है। यह सरासर तानाशाही है। वैसे गोष्ठी में और एक बात कार्यकर्ताओं को खटकी। पार्टी के प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ.व्यासमुनी राय को पहले मंच पर जगह देने की जरूरत नहीं समझी गई। बल्कि इसको लेकर कार्यकर्ताओं में फुसफुसाहट शुरू हुई तब उन्हें मंच पर बुलाया गया।

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