डीपीआरओ की एक और कारस्तानी, डीएम को अंधेरे में रख सेक्रेटरी और प्रधान के खिलाफ दर्ज करवा दी एफआईआर

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बाराचवर(यशवंत सिंह)। अपनी कार्यप्रणाली से बराबर चर्चा में रहने वाले डीपीआरओ रमेश चंद्र उपाध्याय ने एक और कारनामा कर डाला है। मामला बाराचवर ब्लाक की ग्राम पंचायत नारायनपुर का है। शौचालय निर्माण में लाखों रुपये गबन के झूठे आरोप में पंचायत के सेक्रेटरी व प्रधान पर एफआईआर दर्ज करवा दिया है। यही नहीं बल्कि इस मामले में डीपीआरओ ने डीएम तक को अंधेरे में रखा। यह बात तब खुली जब बीते शनिवार को ग्राम पंचायत अधिकारियों के संगठन के लोग डीएम से मिले। डीएम ने डीपीआरओ को तलब किया। तब अपने खिलाफ उठे कई सवालों का डीपीआरओ जवाब तक नहीं दे पाए। डीएम ने मामले की नाजुकता समझ ग्राम पंचायत अधिकारियों को आश्वस्त किया कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद न्यायोचित कार्रवाई होगी।

डीपीआरओ के आदेश पर ब्लाक के एडीओ (पंचायत) की ओर से बीते तीन अक्टूबर को करीमुद्दीनपुर थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में बताया गया है कि स्वच्छता अभियान के तहत ग्राम पंचायत में कुल 304 शौचालयों के निर्माण के लिए प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की दर से धन भेजा गया। उसमें 283 शौचालयों का धन उतार लिया गया, लेकिन उसके सापेक्ष मात्र 192 शौचालयों का निर्माण कागज पर बताया गया। शेष 91 शौचालयों का धन हड़प लिया गया। निर्मित शौचालयों में 70 ऐसे हैं, जिनका धन अपात्रों के नाम पर दर्शाए गए हैं। उनमें पहले से लोगों के घरों में बने शौचालयों को भी योजना से जोड़ दिया गया है। फिर 36 शौचालय ऐसे भी हैं, जिनके निर्माण आधे-अधूरे हैं। इस तरह कुल 31 लाख 64 हजार 600 रुपये का गबन हुआ है।

डीएम की मौजूदगी में ग्राम पंचायत अधिकारियों ने डीपीआरओ के इस आरोप को सप्रणाम बेबुनियाद करार दिया। तब डीपीआरओ ने खुद मौके पर पहुंच कर इसकी जांच करने की बात कही। ग्राम पंचायत अधिकारियों ने सवाल किया कि ऐसा क्या हुआ कि उन्हें खुद मौके पर जाने की जरूरत आई, जबकि डीएम की ओर से नामित नोडल अधिकारी से निर्माण कार्यों का सत्यापन किया जाना है। डीपीआरओ ने जवाब दिया कि उन्हें मौखिक शिकायत मिली थी। मौके पर पहुंच कर उन्होंने सेक्रेटरी को क्यों नहीं बुलवाया। इस सवाल का भी संतोषजनक जवाब डीपीआरओ के पास नहीं था। डीपीआरओ ने बताया कि  मौके पर पहुंच कर नौ शौचालयों की उन्होंने जांच की थी। तब सवाल आया कि उस आधार पर उन्होंने अन्य शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी कैसे मान ली। इसका जवाब भी डीपीआरओ नहीं दे पाए। यह भी पूछा गया कि एफआईआर दर्ज कराने से पहले सेक्रेटरी और प्रधान से जवाब तलब क्यों नहीं हुआ। इस पर डीपीआरओ जमीन ताकने लगे।

ग्राम पंचायत अधिकारियों के मुताबिक उसी क्रम में डीएम के बालाजी ने बताया कि ग्राम पंचायत के सेक्रेटरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की उनसे इजाजत लेने के लिए डीपीआरओ ने बताया था कि वह सारी औपचारिकता पूरी कर चुके हैं। डीपीआरओ के उस कथन के बाद ही उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था। उस वक्त एफआईआर में आरोपित सेक्रेटरी नवीन सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत में 218 शौचालय बन चुके हैं। तब डीएम ने कहा कि वह उसका सचित्र प्रमाण दें। फिर वह जांच कराएंगे। उसके बाद दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी। मालूम हो कि ग्राम पंचायत अधिकारियों से पहले इस प्रकरण को लेकर ग्राम प्रधान संघ का प्रतिनिधिमंडल डीएम से मिला था और डीपीआरओ की पोल खोली थी। प्रतिनिधिमंडल में नारायनपुर की ग्राम प्रधान तमन्ना के प्रतिनिधि नईम खां भी शामिल थे।

…और पिस्तौल के लाइसेंस का भी जिक्र आया

बाराचवर। ग्राम पंचायत अधिकारियों की मानी जाए तो डीएम के दरबार में सेक्रेटरी नवीन सिंह के नाम से हाल में जारी पिस्तौल के लाइसेंस की भी बात उठी। डीएम को बताया गया कि डीपीआरओ यह बात फैला रहे हैं कि उस लाइसेंस को लेकर डीएम साहब नवीन सिंह पर बेहद खफा हैं। यह सुन डीएम की त्यौरियां चढ़ गईं। उन्होंने तल्ख स्वर में कहा कि वह डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हैं। उन्होंने इतनी फुर्सत नहीं कि ग्राम प्रधान और सेकेट्ररी के खिलाफ निजी स्तर पर पड़ें। मालूम हो कि सेक्रेटरी नवीन सिंह कद्दावर नेता व जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन अरुण सिंह के दामाद हैं।