अब्बास अंसारी की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, यूपी सरकार और पुलिस को फटकार

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गाजीपुर। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के समर्थकों के लिए सुकून देने वाली खबर है। अब्बास की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शनिवार को रोक लगा दी। हाईकोर्ट के जस्टिस शबीहुल हसनैन व जस्टिस रेखा दीक्षित की बेंच ने पुलिस और राज्य सरकार को फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा जब लखनऊ के डीएम ने अब्बास अंसारी के असलहे के लाईसेंस के संदर्भ में एनओसी दी थी। फिर ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ दिल्ली पुलिस ने अब्बास अंसारी को लाईसेंस जारी कर दिया था। तब इस मामले में यूपी पुलिस कैसे एफआईआर दर्ज कर ली। केस का न्यायिक क्षेत्र दिल्ली है। यह मामला यूपी के न्यायिक क्षेत्र से बाहर है। कोर्ट ने यूपी सरकार से तीन सप्ताह के अंदर जवाब मांगा कि अब्बास अंसारी पर यूपी पुलिस ने क्यों कार्रवाई की।

मामले की सुनवाई के वक्त अब्बास अंसारी के वकील सिद्धार्थ सिन्हा ने कहा कि दिल्ली से संबंधित मामले के रूप में क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की कमी के कारण यूपी में एफआईआर कतई टिकाऊ नहीं थी। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि लखनऊ पुलिस की छापेमारी में कोई भी प्रतिबंधित असलहे बरामद नहीं हुए, जो असलहे मिले वह कानूनी अनुमति से रखे गए थे।

मालूम हो कि 12 अक्टूबर को लखनऊ के महानगर कोतवाली में अब्बास अंसारी के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि उन्होंने एक ही लाइसेंस पर धोखाधड़ी कर पांच असलहे खरीदे। फिर फर्जीवाड़ा कर असलहे का लाइसेंस दिल्ली ट्रांसफर कराए। उसके बाद ही गुरुवार को अब्बास अंसारी के दिल्ली में वसंत कुंज स्थित आवास पर लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच और दिल्ली पुलिस के सहयोग से छापेमारी की थी। छापेमारी में कुल छह असलहे और चार हजार से अधिक कारतूस बरामद हुए थे। जब्त असलहों में इटली, आस्ट्रिया, यूएस और स्लोवेनिया के बने असलहे, मैगजीन और कारतूस थे। उसके बाद से ही अब्बास अंसारी की गिरफ्तारी को लेकर अटकलें लगाई जाने लगी थीं। तब अब्बास ने हाईकोर्ट की शरण ली। अब्बास अंसारी नेशनल चैंपियन शूटर रहे हैं और इन दिनों अपने पिता की पार्टी बसपा में रह कर सक्रिय सियासत में हैं। 2017 में विधानसभा के चुनाव में मऊ की घोसी सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव भी लड़े थे। भाजपा की लहर के बावजूद उन्होंने उसे कड़ी टक्कर दी थी।

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