मजा ले ………

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पीनी गर शराब किसी की निगाहों में उतर के देख
जीना है गर मुकम्मल, जिन्दगी बाहों में भर के देख

मज़ा लेना गर उल्फत का तो जा छुप कर के कहीं बैठ
फूंक-फूंक के कदम रख इश्क की राहों में डर के देख

जो तेरी नींद ही न उड़ा डाले फिर वह लगन कैसी
मरना चाहता तो किसी की अदाओं पे मर के देख

शोखियों की भी कर बातें शरारतों का भीसी गुलबदन सी मखमली फिजाओं से मुकर के देख

बदली इतनी भी नहीं दुनिया, जितनी समझ बैठा तू
जिधर से आई खुशबू उन दिशाओं से गुजर के देख

डॉ एम डी सिंह

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